हरिद्वार

“जनसंख्या नियंत्रण कानून के साथ शिक्षा, चिकित्सा और न्याय हो निशुल्क: वेद मंदिर आश्रम में आर्य समाजियों की मांग..

हरिद्वार में नवंबर में निकलेगी ऐतिहासिक शोभायात्रा, जनहित मुद्दों को लेकर आर्य समाज करेगा जनजागरण..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: आर्य समाज की मासिक बैठक रविवार को वेद मंदिर आश्रम में आयोजित हुई, जिसमें समाज हित से जुड़े कई अहम मुद्दों पर मंथन हुआ। बैठक में तय किया गया कि आर्य समाज नवंबर माह में हरिद्वार में एक विशाल और ऐतिहासिक शोभायात्रा निकालेगा, जिसके माध्यम से जनसंख्या नियंत्रण कानून, निशुल्क शिक्षा, चिकित्सा और न्याय व्यवस्था, नशा मुक्ति, भ्रूण हत्या उन्मूलन, और चरित्र निर्माण जैसे विषयों पर जनजागरण किया जाएगा।बैठक में पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि आर्य समाज का प्रत्येक कार्य महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्य समाज को अब सिर्फ धार्मिक आंदोलन नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का वाहक बनना होगा। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया और कहा कि “आर्य समाज को संगठित होकर कुप्रथाओं के खिलाफ सड़क पर उतरना होगा। “बैठक में आर्य समाज की महिला प्रतिनिधि प्रीति भाटिया ने महिलाओं को संगठन से जोड़ने और उनकी सक्रिय भागीदारी पर बल दिया। वहीं, यशपाल सिंह आर्य ने लिव-इन रिलेशन और समलैंगिकता संबंधी कानूनों को समाप्त करने की मांग रखी।आर्य समाज हरिद्वार के प्रधान हाकम सिंह ने कहा कि शोभायात्रा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए गांव-गांव और शहरों में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। साथ ही आर्य समाज की मासिक बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने का भी प्रस्ताव रखा गया। पूर्व अध्यक्ष मानपाल सिंह ने कहा कि समाज में चरित्र निर्माण सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। इसके लिए बालक-बालिकाओं के अलग स्कूल, जातिवाद की समाप्ति, और एक समान अभिवादन की परंपरा शुरू होनी चाहिए।स्वामी ओमानंद ने बैठक का संचालन करते हुए कहा कि आर्य समाज ने सदा राष्ट्रवाद और समाजोत्थान के लिए कार्य किया है, अब समय आ गया है कि हम नैतिकता और मूल्यों की पुनर्स्थापना की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा, “यदि शिक्षा श्रेष्ठ होगी, तो समाज में दुख-दर्द स्वतः समाप्त होंगे।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गायत्री मंत्र का पाठ स्त्री-पुरुष दोनों कर सकते हैं। बैठक में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई गई और कहा गया कि “नशा ही भ्रष्टाचार और नैतिक पतन की जड़ है।“इस अवसर पर स्वामी योगेश्वरानंद, स्वामी नरेंद्रानंद, आचार्य रणवीर, करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप राणा, डॉ. दिनेश सिंह, ब्रह्मपाल सिंह, वेदपाल, आनंद स्वरूप वर्मा, डॉ. जयपाल सिंह, स्वामी निगम भारती, स्वामी शिवानंद, स्वामी सुरेंद्रानंद, राकेश आर्य, सुशील भाटिया, योगेंद्र मेधावी सहित बड़ी संख्या में आर्य समाज के पदाधिकारी और अनुयायी उपस्थित रहे।

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