“जश्ने विलादत मौला अली पर इमामबाड़ा अहबाब नगर में मुशायरे का आयोजन..
शिया–सुन्नी एकता की मिसाल बनी महफ़िल, मौला अली की शान में गूंजे कसीदे और शेर..
पंच👊नामा
हरिद्वार: इमामबाड़ा अहबाब नगर में शुक्रवार को जश्ने विलादत मौला अली अलैहिस्सलाम बड़े ही हर्षोल्लास और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संस्था अंजुमन फ़रोग़ ए अज़ा ज्वालापुर की ओर से भव्य महफ़िल-ए-मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें शिया और सुन्नी समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
मुशायरे में मौला अली अलैहिस्सलाम की शान में कसीदे और शेरो-शायरी पेश की गई। शायरों के कलाम पर बार-बार दाद मिली और पूरा माहौल रूहानियत से सराबोर नजर आया। आयोजन ने आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दिया।
संस्था अध्यक्ष हैदर नक़वी ने बताया कि इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मौला अली अलैहिस्सलाम का जन्म 13 रजब को हुआ था। उनका जन्म मक्का में काबा के अंदर हुआ, जो विश्व इतिहास की एक अनोखी और अद्वितीय घटना है। उन्हें अमीर-उल-मोमिनीन कहा जाता है।
मौला अली अलैहिस्सलाम ने हमेशा इस्लामी दुनिया में एकता और संगठन को विशेष महत्व दिया। उनका मानना था कि समाज की भलाई एकजुट रहने में ही है और मतभेद समाज को कमजोर करते हैं।
हैदर नक़वी ने कहा कि मौला अली अलैहिस्सलाम की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं। उनकी खूबियों का वर्णन जीवन भर किया जाए, तब भी पूरा नहीं हो सकता।मुशायरे में बिलाल रज़ा, हैदर नक़वी, जाफ़र रज़ा, ज़हूर हसन, शमीम, अली रज़ा, इक़्तेदार नक़वी, फरहान, सुभान अली, नावेद, मोहसिन, तुराब, शयान, शहज़ाद सहित अन्य शायरों ने कलाम पेश किया।
कार्यक्रम में फिरोज़ जैदी, एहतेशाम अब्बास, जोनी, मुदस्सिर हुसैन, हाजी अमान ख़ान, ज़ीशान, यूसुफ, शब्बू अंसारी, मुनीर, हसीन, समर, जुनैद, साहिल, कैफ़, अली रज़ा, जाफ़र, क़य्यूम, बिलाल, शमीम, इक़बाल, सगीर, मोहम्मद, अली, दानिश आबदी, ज़हूर हसन, खत्ताब, उमैर, फरात, समीर, इख़राज़, फ़ैसल, फ़ैसल अली, क़ादिर सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।



