“ज़ुबान से क्यों निकलते हैं अपशब्द, यही बताती है देवेश चंद्र प्रसाद की पहली पुस्तक “अपशब्द की व्याख्या..
विमोचन से पहले ही सुर्खियां बटोर रही पुस्तक, नामचीन साहित्यकारों ने दी शुभकामनाएं..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। केंद्र सरकार में अनुभाग अधिकारी के रूप में कार्यरत शिवालिकनगर निवासी देवेश चंद्र प्रसाद की पहली पुस्तक ‘अपशब्द की व्याख्या’ विमोचन से पहले ही चर्चाओं में आ गई है। पुस्तक में उन्होंने रोजमर्रा की जिंदगी में बोले जाने वाले अपशब्दों के पीछे छिपे कारणों को सरल और सहज भाषा में समझाने का प्रयास किया है। लेखक के अनुसार गुस्सा, निराशा, मानसिक तनाव और असुरक्षा जैसी भावनाएं व्यक्ति को कटु भाषा की ओर ले जाती हैं।देवेश चंद्र प्रसाद बताते हैं कि अपशब्द केवल शब्द नहीं होते, बल्कि वे व्यक्ति की मानसिक स्थिति, सोच और उसके सामाजिक व्यवहार को भी सामने लाते हैं। भाषा समाज का आईना होती है और हम जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं, वही हमारी पहचान बन जाते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1972 में पिता के बीएचईएल हरिद्वार स्थानांतरण के बाद उनका परिवार यहीं आकर बस गया। इसके बाद हरिद्वार ही उनकी कर्मभूमि और संस्कारभूमि बना। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन तक की पढ़ाई उन्होंने हरिद्वार में ही पूरी की। धर्मनगरी का सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक माहौल उनके जीवन और लेखन को लगातार दिशा देता रहा है। अपनी पुस्तक के जरिए देवेश चंद्र प्रसाद यह संदेश देते हैं कि अभद्र और कड़वे शब्द न केवल सामने वाले को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि बोलने वाले के आत्मविश्वास को भी कमजोर करते हैं।
इसके उलट संयमित और मधुर भाषा सकारात्मक माहौल बनाती है और रिश्तों में मिठास घोलती है। लंबे समय से दिल्ली में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उनका जुड़ाव हरिद्वार से बना हुआ है। लेखन के साथ-साथ गिटार बजाना, सुडोकू खेलना और बागवानी उनकी रुचियों में शामिल है। पहली कृति ‘अपशब्द की व्याख्या’ के माध्यम से उन्होंने समाज में सकारात्मक संवाद और शब्दों के सोच-समझकर इस्तेमाल की जरूरत को मजबूती से सामने रखा है। हरिद्वार की सांस्कृतिक चेतना से उपजी इस पुस्तक को लेकर कई नामचीन साहित्यकारों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।



