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“बार काउंसिल उत्तराखंड चुनाव: रीमा शाहिम ने नैनीताल पहुंचकर दाखिल किया नामांकन..

सदस्य पद के लिए मैदान में उतरीं, युवा व महिला अधिवक्ताओं की मजबूती से उठाने की बात..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। बार काउंसिल उत्तराखंड के आगामी चुनावों को लेकर अधिवक्ता समाज में सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। इसी क्रम में जिला एवं सत्र न्यायालय रोशनाबाद हरिद्वार की अधिवक्ता रीमा शाहिम ने सदस्य पद के लिए नैनीताल पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के अवसर पर उनके साथ बड़ी संख्या में अधिवक्ता साथी मौजूद रहे, जिन्होंने उनका उत्साहवर्धन किया।उत्तराखंड बार काउंसिल का यह चुनाव प्रचलित निर्वाचन प्रक्रिया के अंतर्गत कराया जा रहा है, जिसमें प्रदेशभर से 25 सदस्य निर्वाचित किए जाएंगे। राज्य के सभी अधिवक्ता वरीयता के आधार पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसी सिलसिले में रीमा शाहिम अपने समर्थकों के साथ नैनीताल पहुंचीं और बार काउंसिल उत्तराखंड कार्यालय में विधिवत रूप से नामांकन पत्र प्रस्तुत किया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता शशिकांत शांडिल्य सचिन, भावना, सुहेब, अमजद, अखलाक, सुनील कुमार आदि साथ रहे। नामांकन के बाद अधिवक्ता रीमा शाहिम ने कहा कि बार काउंसिल केवल एक संवैधानिक संस्था नहीं, बल्कि अधिवक्ता समाज की आवाज़ है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य इस मंच के माध्यम से युवा अधिवक्ताओं, महिला वकीलों और संघर्षरत अधिवक्ताओं की समस्याओं को मजबूती से उठाना है। उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं को बैठने की समुचित व्यवस्था, पुस्तकालय, डिजिटल सुविधाएं और न्यायालय परिसरों में बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझना पड़ता है।रीमा शाहिम ने कहा कि महिला अधिवक्ताओं को पेशे के शुरुआती दौर में कई तरह की सामाजिक और व्यावसायिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बार काउंसिल की जिम्मेदारी बनती है कि वह महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगी वातावरण सुनिश्चित करे। उन्होंने यह भी कहा कि युवा अधिवक्ताओं को मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुख अवसर उपलब्ध कराना समय की ज़रूरत है।उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें अधिवक्ताओं का आशीर्वाद और समर्थन प्राप्त होता है, तो वह पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्ठा के साथ अधिवक्ता समाज के हितों के लिए कार्य करेंगी। उनका कहना था कि बार काउंसिल को केवल औपचारिक निर्णयों तक सीमित न रखकर, उसे जमीनी स्तर पर अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

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