“दरगाह की अव्यवस्थाओं पर खामोशी, लेकिन दाल-रोटी पर सख्ती—ये है वक्फ बोर्ड का नया विज़न..!
पहले ही दौरे में नए सीईओ साहब का फरमान—खाने की गुणवत्ता सुधारे, वरना दरगाह नहीं होटल-ढाबों में होगा औचक निरीक्षण..

पंच👊नामा
रुड़की: पिरान कलियर दरगाह में नए साहब की एंट्री क्या हुई, इलाके में चर्चा नहीं बल्कि चर्चा का तड़का लग गया। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त सीईओ शनिवार को दरगाह पहुंचे, कर्मचारियों को दो-चार निर्देश दिए और फिर ऐसा प्रेस-नोट जारी हुआ कि लोगों को समझ ही नहीं आया—साहब वक्फ बोर्ड के सीईओ हैं या फूड-ड्रग्स विभाग के नए इंस्पेक्टर!
प्रेस-नोट में साहब ने दरगाह की बदहाली, ठेकों की मलाई, बकायेदारों की फेहरिस्त या करोड़ों की आमदनी के हिसाब-किताब की बजाय सीधा निशाना साध दिया होटल-ढाबों और मेडिकल स्टोरों पर। कहा गया कि दरगाह क्षेत्र में मिलने वाला खाना घटिया है, खाद्य सामग्री में मिलावट हो रही है और कुछ मेडिकल स्टोर प्रतिबंधित दवाइयां भी बेच रहे हैं। चेतावनी भी दे डाली—एक हफ्ते में सुधार नहीं हुआ तो साहब खुद औचक निरीक्षण करेंगे।
अब यहां लोगों में सवाल उठा—हुजूर, आपकी कुर्सी वक्फ बोर्ड की है या खाद्य सुरक्षा और ड्रग कंट्रोल की? खाने की गुणवत्ता देखने के लिए तो जिले में बाकायदा पूरा महकमा बैठा है, फिर वक्फ बोर्ड के सीईओ को अचानक होटल-ढाबों से इतना प्रेम क्यों उमड़ पड़ा..?
सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि पूरे प्रेस-नोट में दरगाह की व्यवस्था पर एक लाइन तक नहीं लिखी गई। न उन बकायेदारों का जिक्र, जो सालों से वक्फ की रकम दबाए बैठे हैं। न ठेकों में हो रही कथित गड़बड़ियों की चर्चा। न करोड़ों की आय के बावजूद फैली अव्यवस्थाओं, गंदगी और भ्रष्टाचार पर कोई टिप्पणी। यानी दरगाह की सेहत पर चुप्पी, लेकिन होटल की थाली पर पूरी फिक्र!
गौरतलब है कि पिरान कलियर उत्तराखंड की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दरगाह है। यहां हर साल करोड़ों रुपये की आमदनी होती है, लेकिन इसके बावजूद यह दरगाह अक्सर बंदरबांट, भ्रष्टाचार और बदइंतजामी की खबरों में सुर्खियों में रहती है। ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि नए सीईओ कम से कम पहले ही दौरे में दरगाह की “बीमारी” पर कोई दवा लिखेंगे, लेकिन साहब तो रेस्टोरेंट के मेन्यू की जांच में ही लग गए।
इलाके में अब चुटकियां ली जा रही हैं—दरगाह की तिजोरी पर नजर डालने की हिम्मत नहीं, लेकिन होटल की रोटी और दाल पर पूरी सख्ती! लोग कह रहे हैं कि वक्फ बोर्ड के नए मुखिया अगर सच में सुधार चाहते हैं तो पहले उन लोगों पर हाथ डालें जो दरगाह के नाम पर करोड़ों डकार रहे हैं।
फिलहाल साहब का पहला प्रेस-नोट पिरान कलियर में चर्चा नहीं, चटखारे लेकर पढ़ा जा रहा है। अब देखना ये है कि आने वाले दिनों में वक्फ बोर्ड की तलवार दरगाह की अव्यवस्थाओं पर चलती है या फिर होटल-ढाबों और मेडिकल स्टोरों के इर्द-गिर्द ही घूमती रहेगी।



