“चार दशकों तक सच की मशाल जलाने वाले कलम के सिपाही को अंतिम नमन..
रुड़की में नम आंखों से याद किए गए स्वर्गीय राव शाहनवाज खां..

पंच👊नामा
रुड़की: पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि मिशन मानकर जीने वाले, निडरता, ईमानदारी और उसूलों की मिसाल रहे स्वर्गीय राव शाहनवाज खां की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा एक भावुक कर देने वाला दृश्य बन गई।
रुड़की के वरिष्ठ पत्रकार एवं उनके अत्यंत करीबी रहे सुभाष सैनी और तपन सुशील के संयोजन में आयोजित इस सभा में राजनीति, समाज और पत्रकारिता जगत की नामचीन हस्तियों ने शिरकत कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
जैसे ही स्वर्गीय राव शाहनवाज खां के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए, पूरे सभागार में सन्नाटा छा गया। हर चेहरा उनकी बेबाक कलम, निडर आवाज़ और संघर्षपूर्ण जीवन को याद कर गमगीन दिखाई दिया।
“उन्होंने कभी सच का साथ नहीं छोड़ा” — वरिष्ठ पत्रकार सुभाष सैनी….
वरिष्ठ पत्रकार सुभाष सैनी ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि राव शाहनवाज खां पत्रकारिता की आत्मा थे। उन्होंने कहा— “राव शाहनवाज खां केवल मेरे मित्र/सहयोगी नहीं थे, वे मेरे लिए पत्रकारिता में एक खास मुकाम रखते थे।
वे निडर थे, उसूलों पर अडिग थे और खोजी पत्रकारिता में उनका कोई सानी नहीं था। उन्होंने हमेशा दबे-कुचले, शोषित और मजलूम लोगों की आवाज़ को अपनी कलम के जरिए बुलंद किया। ”अपने और राव शाहनवाज खां के साथ बिताए संघर्ष भरे दिनों को याद करते हुए सुभाष सैनी की आवाज़ भर्रा गई।
उन्होंने आगे कहा— “हमने साथ में कई रातें जागकर खबरें लिखीं, सत्ता के दबाव सहे, लेकिन उन्होंने कभी झुकना नहीं सीखा। आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो ऐसा लगता है जैसे पत्रकारिता का एक युग चला गया हो। ”यह कहते-कहते सुभाष सैनी भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। सभागार में मौजूद कई लोग अपनी भावनाएं रोक नहीं सके।
“राव शाहनवाज खां जैसी शख्सियत सदियों में जन्म लेती है” — तपन सुशील…..
वरिष्ठ पत्रकार तपन सुशील ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राव शाहनवाज खां का जीवन नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए पाठशाला है।.उन्होंने कहा— “वे विचारों में स्पष्ट, सोच में गहरे और व्यवहार में बेहद सरल इंसान थे।
राव शाहनवाज खां जैसा व्यक्तित्व सदियों में एक बार आता है। ”उन्होंने आगे कहा— “उनके साथ बिताए गए पल आज भी मेरी स्मृतियों में जीवित हैं। वे सिखाते थे कि पत्रकारिता सत्ता के आगे झुकने का नाम नहीं, बल्कि सच के साथ खड़े रहने का साहस है।
“उन्होंने पत्रकारिता को गरिमा दी” — राव आफाक अली….
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राव आफाक अली ने कहा कि राव शाहनवाज खां ने पत्रकारिता को गरिमा और सम्मान दिलाया। “वे समाज के हर वर्ग की पीड़ा को समझते थे और बिना किसी डर के उसे सामने लाते थे। ऐसे पत्रकार बहुत कम होते हैं, जो सच के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं।
“वे पत्रकारिता के असली प्रहरी थे” — संदीप तोमर….
रुड़की प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार संदीप तोमर ने कहा— “राव शाहनवाज खां पत्रकारिता के असली प्रहरी थे। उन्होंने हमें सिखाया कि खबर लिखते समय किसी पद, सत्ता या दबाव को नहीं, केवल सच को देखना चाहिए। ”उन्होंने कहा कि उनकी कमी पत्रकारिता जगत में हमेशा महसूस की जाएगी।
“उन्होंने कलम से इंसाफ किया” — अमजद उस्मानी….
वरिष्ठ पत्रकार अमजद उस्मानी ने कहा— “राव शाहनवाज खां ने अपनी कलम को कभी बिकने नहीं दिया। उन्होंने कलम से इंसाफ किया और यही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।”
“उनकी सोच आज भी जिंदा है” — सलीम खान….
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सलीम खान ने कहा— “भले ही राव शाहनवाज खां आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, उनके विचार और उनके उसूल आज भी हमारे बीच जीवित हैं।
“सरकार भी उनके योगदान को नमन करती है” — देशराज कर्णवाल….
उत्तराखंड सरकार में दर्जाधारी मंत्री देशराज कर्णवाल ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा— “राव शाहनवाज खां ने समाज के हर तबके की आवाज़ को मंच दिया। उनका योगदान अविस्मरणीय है और सरकार भी उनके कार्यों को नमन करती है।
“वे समाज की आवाज़ थे” — सुभाष सरीन…..
वरिष्ठ समाजसेवी सुभाष सरीन ने कहा— “वे सिर्फ पत्रकार नहीं थे, बल्कि समाज की आवाज़ थे। उन्होंने हमेशा सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता दी।
”इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार दीपक मिश्रा, प्रिंस शर्मा, चौ. अनवर राणा, रियाज कुरैशी, प्रवेज़ आलम, बबलू सैनी, वीरेंद्र चौधरी, हरिओम गिरी, मुनव्वर अली साबरी, अहमद भारती, रियाज पुंडीर, आरिफ नियाजी, असलम अंसारी, सनदीप कश्यप, संदीप चौधरी,
सहित अनेक पत्रकारों ने स्वर्गीय राव शाहनवाज खां के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। कार्यक्रम का माहौल गमगीन था, लेकिन हर आंख में यह विश्वास झलक रहा था कि राव शाहनवाज खां की कलम, उनके उसूल और उनका संघर्ष हमेशा पत्रकारिता की राह रोशन करता रहेगा।



