हरिद्वार

“भगत सिंह चौक पर अवैध होर्डिंग पर सवाल, शासन का लोगो लगाकर प्रशासन की आंखों में झोंकी धूल..

निगम की एनओसी के बिना लगा विज्ञापन बोर्ड, स्वच्छता अभियान निपटने के बाद लगाया फ्लेक्स, जवाबदेही किसकी

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: मध्य हरिद्वार के पर लगा एक विशालकाय होर्डिंग इन दिनों शहर में चर्चा और सवालों का केंद्र बना हुआ है। मामला सिर्फ एक विज्ञापन बोर्ड का नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह होर्डिंग रेलवे की जमीन पर स्थापित है, जबकि नियमानुसार किसी भी बड़े विज्ञापन बोर्ड के लिए से एनओसी लेना अनिवार्य होता है। आरोप है कि बिना अनुमति के ही यह होर्डिंग खड़ा कर दिया गया और संबंधित विभागों की निगाह तक इस पर नहीं पड़ी।मामले को और गंभीर बनाता है वह तथ्य, जिसमें अवैध होर्डिंग पर कार्रवाई से बचने के लिए का लोगो तक इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आ रही है। बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी निजी या अवैध होर्डिंग को बचाने के लिए शासन के प्रतीक चिन्ह का उपयोग किया जा सकता है? यदि हां, तो इसकी अनुमति किसने दी..? और यदि नहीं, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई..?इसी बीच 7 फरवरी को जिले में स्वच्छता महाअभियान चलाया गया था, जो के निर्देश पर आयोजित हुआ। चौंकाने वाली बात यह है कि अभियान समाप्त होने के बाद 9 फरवरी के बाद उसी कार्यक्रम से जुड़ा फ्लेक्स इस होर्डिंग पर लगा दिया गया। सवाल उठ रहा है कि जब कार्यक्रम संपन्न हो चुका था, तब उसके प्रचार का फ्लेक्स लगाने की जरूरत क्यों पड़ी..? क्या यह अवैध होर्डिंग को वैधता का आभास देने की कोशिश थी..? सूत्रों का दावा है कि इस होर्डिंग को बचाने के लिए अंदरखाने लगातार जुगत लगाई जा रही है और कुछ कथित समाजसेवी भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यदि ऐसा है, तो क्या यह प्रशासनिक तंत्र को प्रभावित करने की कोशिश नहीं मानी जाएगी..? अब सबसे बड़ा प्रश्न नगर निगम और जिला प्रशासन की भूमिका पर खड़ा हो रहा है— क्या बिना एनओसी के रेलवे भूमि पर होर्डिंग लगाना नियमों का खुला उल्लंघन नहीं है..? क्या शासन का लोगो लगाकर कार्रवाई से बचने का प्रयास किया गया..? अभियान खत्म होने के बाद फ्लेक्स लगाने का उद्देश्य क्या था..? जिम्मेदार विभागों ने अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया..? निगाहें अब नगर निगम और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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