उत्तराखंड

“सख्ती और संवेदनशीलता की मिसाल… आईपीएस श्वेता चौबे का अनुशासन, साहस और जनसेवा से भरा सफर..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून: उत्तराखंड पुलिस की तेजतर्रार और कर्मठ आईपीएस अधिकारी श्वेता चौबे ने अपने अनुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा के जज्बे से पुलिस बल में एक खास मुकाम हासिल किया है। 2016 बैच की यह अधिकारी वर्तमान में आईआरबी द्वितीय बटालियन, देहरादून की सेनानायक हैं और इससे पहले चमोली व पौड़ी गढ़वाल जैसे संवेदनशील जनपदों में एसपी और एसएसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।श्वेता चौबे ने 2005 में बतौर डीएसपी उत्तराखंड पुलिस सेवा से करियर की शुरुआत की और लगातार अपने काम से पहचान बनाई। उन्हें हरिद्वार, देहरादून और मसूरी जैसे अहम स्थानों पर अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए जाना जाता है।प्रमुख उपलब्धियाँ…..
महाकुंभ 2010: हरिद्वार में भीड़ और यातायात नियंत्रण की चुनौती को कुशलता से निभाया, मुख्यमंत्री सम्मान से नवाज़ा गया।
केदारनाथ आपदा 2013: राहत व बचाव कार्यों में अहम भूमिका, सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित।
अर्धकुंभ 2016 : भीड़ प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन।
देहरादून ग्रामीण: खनन व शराब माफिया पर सख्त कार्रवाई।
सीआईडी में भर्ती घोटाला: स्ढ्ढञ्ज के जरिए पर्दाफाश, दोषियों पर कानूनी शिकंजा।
ऑपरेशन पिंक: महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान की शुरुआत।
पौड़ी में कानून व्यवस्था: अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी।
च्पिंक टीमज् गठन: थानों में महिला सुरक्षा यूनिट की स्थापना और आत्मरक्षा प्रशिक्षण।सम्मान और पुरस्कार….
श्वेता चौबे को अब तक मुख्यमंत्री सम्मान, सराहनीय सेवा पदक, विशिष्ट सेवा पदक, वीरता पुरस्कार, राष्ट्रपति योग्यता पदक और हाल ही में २०२५ का स्कॉच अवॉर्ड जैसे कई राष्ट्रीय-राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुके हैं।उनकी कार्यशैली में सख्ती और संवेदनशीलता का संतुलन साफ झलकता है। वे केवल आदेश देने वाली अधिकारी नहीं, बल्कि टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मैदान में उतरने वाली नेता हैं। अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस और जनता के बीच भरोसा कायम करना उनका मुख्य लक्ष्य है। श्वेता चौबे का सफर यह साबित करता है कि समर्पण, साहस और ईमानदारी के साथ हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।

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