हरिद्वार

“ईद-उल-अजहा पर तीन दिन की कुर्बानी को मांस दुकानों की शिफ्टिंग से अलग रखने की मांग, पार्षद अरशद ख्वाजा ने दिया ज्ञापन..

बोर्ड बैठक के दौरान मेयर-एमएनए ने दिलाया भरोसा, सभी पार्षदों ने जताई सहमति..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: नगर निगम क्षेत्र में कच्चे मांस की दुकानों को शहर से बाहर निर्धारित स्थानों पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया के बीच ज्वालापुर क्षेत्र के पार्षद अरशद ख्वाजा ने बोर्ड बैठक के दौरान मुख्य नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर तीन दिनों तक होने वाली कुर्बानी को इस प्रक्रिया से अलग रखने की मांग की है। उन्होंने जनभावनाओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में स्पष्ट लिखित आदेश जारी करने की अपील की है।पार्षद अरशद ख्वाजा ने अपने ज्ञापन में कहा कि नगर निगम हरिद्वार द्वारा कच्चे मांस की दुकानों को निगम क्षेत्र से बाहर शिफ्ट करने की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है, जबकि उपनगरी ज्वालापुर में करीब दो लाख मुस्लिम आबादी निवास करती है, जो हर वर्ष ईद-उल-अजहा का पर्व धार्मिक परंपराओं के अनुसार तीन दिनों तक कुर्बानी देकर मनाती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और मुस्लिम समुदाय की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।उन्होंने कहा कि कुर्बानी के दौरान स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं की आवश्यकता रहती है और यदि मांस की दुकानों की शिफ्टिंग से जुड़े निर्देशों में ईद-उल-अजहा के तीन दिनों को अलग नहीं रखा गया तो भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि निगम इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि धार्मिक भावनाओं का सम्मान बना रहे और सामाजिक सौहार्द कायम रहे।बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष समेत सभी पार्षदों ने भी सहमति जताई और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ईद-उल-अजहा के तीन दिनों की कुर्बानी को अलग रखने की बात का समर्थन किया। इस संबंध में महापौर किरण जैसल और मुख्य नगर आयुक्त नंदन कुमार ने पार्षद को सकारात्मक कार्यवाही का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि मामले पर गंभीरता से विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा।पार्षद अरशद ख्वाजा ने उम्मीद जताई है कि नगर निगम प्रशासन जल्द ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करेगा, जिससे शहर में आपसी भाईचारा और कानून-व्यवस्था बनी रहे तथा किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

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