
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: ज्वालापुर की मयूर विहार कॉलोनी में गली में गेट लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। अपने खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के अगले ही दिन बिल्डर पक्ष में गुणा भाग करते हुए पीड़ित पक्ष पर ही क्रास एफआईआर दर्ज करा दी। खास बात यह है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तमाम वीडियो में बिल्डर पक्ष के लोग ही दूसरे पक्ष के साथ मारपीट करते साफ नजर आ रहे हैं। लेकिन पीड़ित पक्ष पर ही न सिर्फ क्रॉस एफआईआर कर दी गई, बल्कि महिलाओं तक को नामजद कर दिया गया। इस पूरे खेल में एक माननीय की भूमिका अहम बताई जा रही है।
कॉलोनी में 12 जुलाई को गेट लगाने को लेकर विवाद हुआ था। बिल्डर सतीश त्यागी वह कुछ अन्य लोग गेट लगाना चाहते थे। जबकि संदीप अरोड़ा और परमानंद पोपली के परिवार ने इसका विरोध किया था। इन दोनों परिवारों के साथ 24 घंटे के भीतर दो बार मारपीट की गई थी।
तब जाकर पुलिस ने आरोपी पक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन इससे पहले कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करती बिल्डर पक्ष ने अपनी राजनीतिक पकड़ और अन्य प्रभावों का इस्तेमाल करते हुए पीड़ित पक्ष पर ही काउंटर एफआईआर करा दी।
बिल्डर सतीश त्यागी के ड्राइवर मोनू कुमार की तहरीर पर पुलिस ने संदीप अरोड़ा, परमानंद पोपली सहित उनके परिवार की महिलाओं मोनिका, आयुषी और गीता को भी नामजद कराया गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बिल्डर पक्ष के लोग बहसबाज़ी, गाली गलौच, मारपीट और धक्कामुक्की करते नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिल्डर की राजनीतिक पकड़ और शहर के एक प्रभावशाली ‘माननीय’ के हस्तक्षेप से दबाव बनाने के लिए क्रॉस मुकदमा दर्ज कराया है।
ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह का कहना है कि दोनों पक्षों की तहरीर पर कार्रवाई की गई है और निष्पक्ष जांच की जा रही है। हालांकि, सवाल अब भी कायम है — जब वीडियो में साफ दिख रहा है कि हमला किसने किया, तो फिर पीड़ितों के खिलाफ एफआईआर क्यों?