“गणेश गोदियाल भी दूर नहीं कर पा रहे हरिद्वार में कांग्रेस की गुटबाजी, संगठन अलग, छह विधायकों की दिशाएं अलग-अलग..

पंच👊नामा
रत्नमणि डोभाल, हरिद्वार: अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले हरिद्वार में कांग्रेस की गुटबाजी थमती नजर नहीं आ रही। जिले में संगठन अलग चल रहा है और छह विधायक अलग-अलग दिशा में सक्रिय हैं। ऐसे हालात में जहां सीटें बढ़ाने की उम्मीद कमजोर है, वहीं मौजूदा सीटें बचाना भी चुनौती बनता दिख रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की सक्रियता के बावजूद हरिद्वार शहर और जिले में कांग्रेस संगठन एकजुट नहीं हो पाया है। जिला और महानगर स्तर पर तालमेल की कमी साफ दिखाई देती है। बड़े मुद्दों पर सामूहिक रणनीति कम ही बन पाती है और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों तक सीमित नजर आते हैं।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा ने संगठन की ताकत को कमजोर किया है। इसका फायदा भाजपा को मिलता रहा है। खासकर मदन कौशिक की पकड़ हरिद्वार की राजनीति में लगातार मजबूत बनी हुई है, जिसके सामने कांग्रेस ठोस चुनौती खड़ी नहीं कर पा रही।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की सक्रियता भी जिले में अलग राजनीतिक धारा बनाती दिखती है। समर्थकों और अन्य गुटों के बीच तालमेल की कमी संगठनात्मक एकता को और कमजोर करती है। महानगर स्तर पर भी नेतृत्व के प्रयासों के बावजूद कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच दूरी बनी हुई है।
स्थिति यह है कि चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अभी तक हरिद्वार में साझा रणनीति और मजबूत संगठन खड़ा नहीं कर पाई है। जहां भारतीय जनता पार्टी अपने नेटवर्क के दम पर मजबूत दिख रही है, वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अंदरूनी मतभेदों से जूझ रही है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर जल्द ही संगठन और विधायक एक दिशा में काम नहीं करते, तो अगले चुनाव में सीटें बढ़ना मुश्किल ही नहीं, बल्कि मौजूदा सीटों का आंकड़ा घटने का खतरा भी बना रहेगा।



