उत्तराखंड

“उधमसिंहनगर में किसान ने की आत्महत्या, सीएम धामी ने डीजीपी से मांगी रिपोर्ट, पूरी पुलिस चौकी लाइन हाजिर..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
उधमसिंह नगर: जनपद के पैगा गांव में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले ने शासन से लेकर पुलिस महकमे तक हड़कंप मचा दिया है। घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस महानिदेशक से पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। वहीं मामले में पुलिस की घोर लापरवाही सामने आने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा ने बड़ी विभागीय कार्रवाई करते हुए पुलिस चौकी के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया है।परिजनों के अनुसार किसान सुखवंत सिंह पुत्र तेजा सिंह लंबे समय से मानसिक दबाव और परेशानियों से जूझ रहा था। उसकी समस्याओं को लेकर पुलिस से संपर्क किया गया, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता तो शायद किसान को यह आत्मघाती कदम नहीं उठाना पड़ता। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।किसान की आत्महत्या के बाद कराई गई प्राथमिक जांच में पुलिस स्तर पर गंभीर उदासीनता और लापरवाही उजागर हुई। इसके बाद एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने कार्रवाई करते हुए कोतवाली आईटीआई के थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक कुंदन सिंह रौतेला और उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। दोनों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई है।इसके साथ ही चौकी पैगा, कोतवाली आईटीआई पर तैनात पूरी पुलिस चौकी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। लाइन हाजिर किए गए पुलिस कर्मियों में—उपनिरीक्षक एवं चौकी प्रभारी जितेंद्र कुमार,
अपर उपनिरीक्षक सोमवीर सिंह,
कांस्टेबल भूपेंद्र सिंह,
कांस्टेबल दिनेश तिवारी,
मुख्य कांस्टेबल शेखर बनकोटी,
कांस्टेबल सुरेश चंद्र,
कांस्टेबल योगेश चौधरी,
कांस्टेबल राजेंद्र गिरी,
कांस्टेबल दीपक प्रसाद
और कांस्टेबल संजय कुमार शामिल हैं।मुख्यमंत्री कार्यालय से डीजीपी को निर्देश दिए गए हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट शासन को सौंपी जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किसान की शिकायतों के स्तर पर कहां-कहां चूक हुई। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया गया है।इधर गांव में शोक सभाओं का दौर जारी है। सुखवंत सिंह को मेहनती और जिम्मेदार किसान बताया जा रहा है, जिसकी मौत ने पूरे गांव को भीतर तक झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी यह है कि भविष्य में किसी किसान की पीड़ा को अनसुना न किया जाए।

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