अपराधहरिद्वार

“जीआरपी हरिद्वार की मानवीय पहल, नववर्ष से पहले दो परिवारों को मिली खुशियों की सौगात..

एसपी रेलवेज़ अरुणा भारती के नेतृत्व में बड़ी कामयाबी, डेढ़ साल से लापता महिला व युवक सकुशल मिले..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: नववर्ष से ठीक पहले जीआरपी हरिद्वार पुलिस ने सराहनीय और संवेदनशील कार्रवाई करते हुए दो परिवारों को बड़ी राहत और खुशियां दी हैं। एसपी रेलवेज़ अरुणा भारती के कुशल नेतृत्व में जीआरपी हरिद्वार ने करीब डेढ़ वर्ष से गुमशुदा एक महिला और एक पुरुष को गैर राज्यों से सकुशल खोजकर उनके परिजनों के सुपुर्द किया। अपनों से बिछड़े परिजनों को वापस पाकर परिवारजनों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने जीआरपी पुलिस का बार-बार धन्यवाद किया।बरामद किए गए दोनों गुमशुदा व्यक्ति बोलने या मानसिक रूप से कमजोर थे, जिस कारण उन्हें तलाश करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। लेकिन इंस्पेक्टर जीआरपी हरिद्वार बिपिन चन्द्र पाठक के नेतृत्व में जीआरपी हरिद्वार पुलिस ने लगातार प्रयास, तकनीकी संसाधनों और मानवीय संवेदना के साथ दोनों मामलों में सफलता हासिल की।
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केस–01 डेढ़ साल बाद मिली रामाबाई, परिवार में लौटी रौनक…..मध्य प्रदेश निवासी रामाबाई (उम्र लगभग 62 वर्ष) वर्ष 2024 में अपने परिजनों के साथ हरिद्वार आई थीं। 22 मई 2024 को हरिद्वार रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर अत्यधिक भीड़ के चलते वे अपने परिजनों से बिछड़ गईं। मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण रामाबाई न तो सही तरह से बोल पा रही थीं और न ही किसी को यह बता पा रही थीं कि उन्हें कहां जाना है। काफी खोजबीन के बाद भी जब उनका कोई पता नहीं चला तो उनकी बहन कुसुम देवी, निवासी कठोलिया पंचायत मझौली (मध्य प्रदेश) द्वारा थाना जीआरपी हरिद्वार में गुमशुदगी दर्ज करवाई गई। इसके बाद जीआरपी हरिद्वार पुलिस ने उत्तराखंड सहित हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश व पंजाब में लगातार तलाश जारी रखी। लगभग डेढ़ वर्ष बाद जीआरपी हरिद्वार पुलिस को बड़ी सफलता तब मिली, जब रामाबाई नोएडा स्थित “अपना घर आश्रम” में सुरक्षित मिलीं। परिजनों को सूचना देकर फोटो के माध्यम से पहचान करवाई गई और विधिक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत रामाबाई को सकुशल उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इस मानवीय कार्य के लिए परिजनों ने एसपी रेलवेज़ अरुणा भारती एवं पूरी जीआरपी टीम का आभार जताया।
पुलिस टीम…..
उपनिरीक्षक प्रीति कर्णवाल, जीआरपी हरिद्वार
कांस्टेबल ईश्वर नेगी, जीआरपी हरिद्वार
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केस–02 : बोलने में अक्षम विवेक वर्मा मिले पटना में….राजनगर कॉलोनी, ज्वालापुर (हरिद्वार) निवासी विवेक वर्मा (उम्र 35 वर्ष) 20 जुलाई 2024 को तांगा स्टैंड रेलवे स्टेशन हरिद्वार से अचानक गुमशुदा हो गए थे। विवेक बोलने में अक्षम थे और पढ़ना-लिखना भी नहीं जानते थे, केवल इशारों से ही अपनी बात समझा पाते थे। उनके लापता होने से परिजन बेहद चिंतित हो गए और थाना जीआरपी हरिद्वार में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। जीआरपी हरिद्वार पुलिस ने विवेक वर्मा की तलाश में उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। डीसीआरबी, एससीआरबी, नेटग्रिड पोर्टल, पंपलेट और लगातार पूछताछ के बावजूद काफी समय तक सफलता नहीं मिल सकी। लगातार प्रयासों और अथक मेहनत के बाद आखिरकार जीआरपी हरिद्वार पुलिस टीम ने बिहार के पटना रेलवे स्टेशन से विवेक वर्मा को सकुशल बरामद कर लिया। लगभग डेढ़ वर्ष बाद अपने भाई को वापस पाकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विवेक के भाई आर्यन वर्मा (ज्वालापुर), बहन सरिता सिंह (मैनपुरी) और बहन संगीता (फिरोजाबाद) सपरिवार थाना जीआरपी हरिद्वार पहुंचे और पुलिसकर्मियों का धन्यवाद किया। साथ ही फोन पर एसपी रेलवेज़ अरुणा भारती से बातचीत कर विशेष आभार व्यक्त किया।
पुलिस टीम……
हेड कांस्टेबल पृथ्वी नेगी, जीआरपी हरिद्वार
हेड कांस्टेबल जाहुल हसन, जीआरपी हरिद्वार

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