
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: लक्सर में पुलिस के वाहन में मेरठ के कुख्यात गैंगेस्टर विनय त्यागी पर अंधाधुंध गोलियां मारने की घटना केवल दो हमलावरों तक सीमित नहीं है। हत्याकांड की परतें अब लगातार खुलती जा रही हैं।
दोनों हमलावर भले ही उधमसिंहनगर के बताए जा रहे हों, लेकिन साजिश की डोर सैकड़ों करोड़ के एक्सप्रेस-वे ठेकेदार तक जुड़ने की चर्चा तेज हो गई है।
जांच की दिशा देहरादून में हुई एक रहस्यमयी चोरी और उसके बाद विनय त्यागी को हरिद्वार शिफ्ट करने की पूरी पटकथा पर टिक गई है। सवाल उठ रहे हैं कि साजिश में कितने सरकारी, कितने गैर सरकारी मोहरे शामिल…?
अब तो परिजन भी खुलकर ठेकेदार की सैकड़ो करोड़ की रकम के चलते हत्या के आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। इस पूरी कहानी में झोल ही झोल है और बहुत ऊंचे लेवल की साजिश की चर्चाएं बनी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार, देहरादून में हुई चोरी कोई सामान्य वारदात नहीं थी। सवाल यह भी उठ रहा है कि हत्या, अपहरण और करोड़ों की रंगदारी के मामलों में नामजद विनय त्यागी किसी परिचित के घर के बाहर खड़ी कार से महज नकदी–जेवर की चोरी क्यों करेगा।
आशंका जताई जा रही है कि कार में कुछ ऐसे दस्तावेज या कीमती सामग्री थी, जो कई प्रभावशाली लोगों के लिए खतरा बन सकती थी।
इसी शक के बाद विनय त्यागी को देहरादून की हाई सिक्योरिटी जेल से रुड़की जेल शिफ्ट करने की कवायद शुरू हुई। माना जा रहा है कि शिफ्टिंग के दौरान ही उसे रास्ते में खत्म करने की रणनीति बनाई गई।
लक्सर के पास पुलिस कस्टडी में उस पर हमला हुआ, हालांकि मौके पर योजना पूरी नहीं हो सकी। बाद में एम्स ऋषिकेश में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
गौरतलब है कि शिफ्टिंग की हलचल से पहले ही विनय त्यागी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में जान का खतरा जताते हुए प्रार्थना पत्र दिया था। फिलहाल पुलिस ने दोनों शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सवाल यही है कि क्या जांच केवल मोहरे बने हमलावरों तक सीमित रहेगी या साजिश के बड़े चेहरे भी बेनकाब होंगे।



