“बेहिसाब मेहनत, बेमिसाल खिदमत”—कलियर दरगाह की खिदमत में समर्पण और सफाई का परचम, मामू की टीम..
दरगाह की रौनक बरकरार रखने वाले खामोश नायक, हर कोना चमकाएं, हर नाली साफ करें – बिना थके, बिना रुके..
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पंच👊नामा
पिरान कलियर: एक ऐसी जगह जो अपनी रूहानियत और आस्था के लिए दुनियाभर में मशहूर है। यहाँ हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक (रह.) की दरगाह पर हर रोज हजारों जायरीन हाजिरी देने आते हैं। उनकी सेवा और सहूलत के लिए दरगाह दफ्तर तो अपनी भूमिका निभाता ही है, लेकिन इसके साथ ही एक ऐसी टीम भी है, जो बिना किसी स्वार्थ के, बिना किसी इनाम-इकराम के, सिर्फ और सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए
दिन-रात दरगाह और उसके आसपास की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने में जुटी रहती है। ये टीम है ‘मामू की टीम’, जो अपने जज़्बे और समर्पण के लिए पूरे कलियर में मशहूर है।
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खिदमत का अनूठा जज़्बा……‘मामू की टीम’ सिर्फ एक सफाई दल नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और इंसानियत की अनूठी मिसाल है। इस टीम के सदस्य दरगाह परिसर की नालियों और नालों की सफाई से लेकर, वहां से निकलने वाली गंदगी को अपने हाथों से उठाकर दूर फेंकते हैं।
झाड़ू-पोछा लगाकर हर कोने को चमकाते हैं। इनका यह निःस्वार्थ सेवा भाव ही दरगाह की पाकीज़गी को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
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हाजिरी वालों की तहे दिल से खिदमत….इस टीम की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ साधारण लोग ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे और संपन्न परिवारों के लोग भी शामिल हैं। ये लोग दुनिया की दिखावे वाली चकाचौंध से कोसों दूर रहकर सिर्फ और सिर्फ अपने रब की रज़ा के लिए इस काम को अंजाम देते हैं। बिना किसी लालच, बिना किसी तनख्वाह के, सिर्फ अपनी आत्मा की सुकून के लिए ये सफाई व्यवस्था को सुधारने में लगे रहते हैं।
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मामू की टीम—कलियर की शान…कलियर के लोगों का कहना है कि अगर ‘मामू की टीम’ इस सेवा से हट जाए, तो यहां की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। मामू और उनकी टीम का जज़्बा यह बताता है कि सच्ची खिदमत सिर्फ इबादतगाहों में दुआ करने से नहीं होती, बल्कि उनके आस्तानों की पाकीज़गी बनाए रखने से भी होती है।
————————————इस निस्वार्थ सेवा के लिए ‘मामू की टीम’ बधाई की पात्र है। यह टीम सिर्फ सफाई ही नहीं करती, बल्कि आस्था, सेवा और इंसानियत का पैगाम भी देती है। दरगाह की पाकीज़गी बनाए रखने में इनका योगदान सराहनीय है और आने वाली नस्लों के लिए एक बेहतरीन मिसाल है।