“जगद्गुरु और महामंडलेश्वर की उपाधि देना अखाड़ों का अधिकार: श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी..
सनातन धर्म को बदनाम करने वालों पर चलेगा ‘कालनेमि अभियान’, कुंभ में नहीं मिलेगा प्रवेश..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: अखाड़ों द्वारा संतों को जगद्गुरु और महामंडलेश्वर की उपाधि दिए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह अखाड़ों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जैसे विश्वविद्यालय अपने मापदंडों के आधार पर डॉक्टरेट या एमफिल जैसी उपाधियां प्रदान करते हैं, उसी प्रकार संत समाज में भी अखाड़ों को योग्य संतों को सम्मानित करने का अधिकार है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने बुधवार को कहा कि देश में मौजूद सभी 13 अखाड़ों के अपने नियम, कानून और परंपराएं हैं। इन परंपराओं के अनुसार ही संतों की योग्यता, साधना, सेवा और सामाजिक योगदान को देखते हुए उन्हें जगद्गुरु और महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की जाती है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में आचार्य प्रमोद कृष्णम और स्वामी चक्रपाणि को जगद्गुरु की उपाधि दिए जाने के बाद कुछ स्थानों पर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है, जबकि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। अखाड़ों के मापदंडों पर खरे उतरने वाले उच्च कोटि के संतों को यह सम्मान दिया जाता है और इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि अखाड़े समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संतों को जगद्गुरु और महामंडलेश्वर की उपाधि देकर उन्हें समाज और धर्म के प्रति अधिक समर्पण के साथ सकारात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह सम्मान केवल पद या प्रतिष्ठा का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसके साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग भगवा वस्त्र धारण कर मनमानी कर रहे हैं, जिससे सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए अखाड़ा परिषद की ओर से कालनेमि अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत सनातन धर्म को बदनाम करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में आयोजित होने वाले किसी भी कुंभ मेले में ऐसे तथाकथित साधुओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, जो सनातन धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचाने का काम करते हैं।



