हरिद्वार

क़ुद्स दिवस पर ज्वालापुर में फ़िलिस्तीन के समर्थन में गूंज उठी आवाज़ें, अंजुमन फ़रोग़ ए अज़ा ने किया आयोजन..

मस्जिद-ए-अक़्सा की हिफ़ाज़त और इंसाफ़ की मांग को लेकर हुआ शांतिपूर्ण प्रदर्शन..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: रमज़ान के पाक महीने के आखिरी जुमे को हरिद्वार में अंजुमन फ़रोग़ ए अज़ा के बैनर तले क़ुद्स दिवस का आयोजन पूरे जोश, जज़्बे और इख़लास के साथ किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई अंजुमन के अध्यक्ष हैदर नक़वी ने की। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत कर फ़िलिस्तीन के मजलूमों के हक़ में आवाज़ बुलंद की और इस्राइली जुल्म के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
———————————–
मस्जिद-ए-अक़्सा की आज़ादी की पुकार…..हैदर नक़वी ने कहा, “हर साल रमज़ान के अलविदा जुमे को क़ुद्स दिवस के रूप में मनाने का मकसद मस्जिद-ए-अक़्सा को इस्राइली कब्जे से मुक्त कराना और फिलिस्तीनी अवाम के साथ एकजुटता जताना है। यह सिर्फ एक सियासी मुद्दा नहीं, बल्कि इंसानियत और धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है। ”उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस्राइल द्वारा मासूम बच्चों और बेगुनाह नागरिकों पर किए जा रहे अत्याचार मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध हैं और दुनिया को इन ज़ुल्मों के खिलाफ एकजुट होकर मजलूमों का साथ देना चाहिए।
———————————–
भारत सरकार से की गई अहम अपील…….अंजुमन फ़रोग़ ए अज़ा ने भारत सरकार से अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ़िलिस्तीन के समर्थन में अपना रुख स्पष्ट करे और इस्राइली बर्बरता को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए। हैदर नक़वी ने कहा, “मस्जिद-ए-अक़्सा मुस्लिम समाज की आस्था का केंद्र है, उसकी हिफ़ाज़त और फिलिस्तीनियों की जान की हिफ़ाज़त के लिए भारत सरकार को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
———————————–
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और बुलंद नारों की गूंज…..आयोजन के दौरान लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया। हाथों में फ़िलिस्तीन के झंडे, बैनर और पोस्टर लिए प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की – “मस्जिद-ए-अक़्सा हमारी जान है!, “इंसाफ़ चाहिए, इंसाफ़ चाहिए!, “इस्राइली ज़ुल्म बंद करो!” प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नामों में फ़िरोज़ ज़ैदी, एहतेशाम अब्बास, अस्करी रज़ा, हसन ज़ैदी, हादी हसन, बिलाल रज़ा, जाफ़र हुसैन, हुसैन हैदर, अरशद ज़ैदी, ग़ाज़ी, अली रज़ा, मोहम्मद मुजतबा, सग़ीर, फरहान, मोहम्मद आदि शामिल रहे।
———————————–
क़ुद्स दिवस का इतिहास और महत्व…..क़ुद्स दिवस पहली बार 1979 में मनाया गया था और तब से यह हर साल रमज़ान के आखिरी जुमे को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य फ़िलिस्तीन की आज़ादी के लिए वैश्विक समर्थन जुटाना और इस्राइली कब्जे से मस्जिद-ए-अक़्सा की हिफाज़त के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जागरूक करना है।
———————————–
आख़िरी पैग़ाम – ज़मीर की आवाज़……..कार्यक्रम के समापन पर हैदर नक़वी ने कहा, “जब तक दुनिया में एक भी मजलूम पर ज़ुल्म होगा, हमारी आवाज़ खामोश नहीं होगी। क़ुद्स दिवस महज़ एक दिन नहीं, बल्कि यह हमारे ज़मीर की आवाज़ है – इंसाफ़ के हक़ में और ज़ुल्म के खिलाफ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Translate »
error: Content is protected !!