“सीएम धामी के साप्ताहिक दौरों पर ‘फोटो पॉलिटिक्स’ हावी..? पुलिस प्रोटोकॉल पर बवाल, कटघरे में भाजपा नेता..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार में मुख्यमंत्री के लगातार दौरों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। सवाल यह नहीं कि सीएम आ रहे हैं, सवाल यह है कि हर बार भाजपाइयों की ‘फोटो ब्रिगेड’ क्यों उमड़ पड़ती है? शहर की समस्याएं जस की तस, लेकिन हेलीपैड पर मौजूदगी दर्ज कराने की होड़ बनी रहती है।
————————————–
गौरतलब है कि 7 मार्च को हरिद्वार में होने जा रही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की जनसभा की तैयारी पर रखने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंगलवार को हरिद्वार पहुंचे थे। इस दौरान हेलीपैड पर कुछ भाजपा नेताओं को रोकने पर दर्जाधारी ओमप्रकाश जमदग्नि ने नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद एचआरडीए सचिव मनीष कुमार सिंह और एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह ने उन्हें मनाया था।
इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है इस घटना के बाद एक नई बहस छिड़ गई है। हिंदू क्रांति दल के वरिष्ठ नेता चरणजीत पाहवा ने सीधा सवाल दागा है कि ड्यूटी निभाने पर पुलिस को कटघरे में क्यों खड़ा किया जा रहा है? क्या प्रोटोकॉल अब नेताओं की सुविधा से चलेगा? पाहवा ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “हफ्ते में दो बार सीएम हरिद्वार आते हैं।
कितनी बार किसी नेता ने शहर की समस्याओं पर खुलकर बात रखी? या फिर मकसद सिर्फ कैमरे के सामने दिखना भर है? ”संगठन के वरिष्ठ नेता चरणजीत पाहवा ने पूछा है कि मुख्यमंत्री समेत सभी वीआईपी को प्रोटोकॉल के हिसाब से सुरक्षा देना पुलिस का कर्तव्य है और पुलिस के जवान कड़ी धूप सर्दी गर्मी बरसात में अपना फर्ज निभाते हैं।
यदि मुख्यमंत्री की सुरक्षा और प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था बना रहे हैं तो माफी मांगने का क्या औचित्य है। हालांकि पाहवा ने दर्जाधारी ओमप्रकाश जमदग्नि को अपने भाई समान बताया है और कहा कि वह हमेशा उनका सम्मान करते हैं। लेकिन आम भाजपाइयों से सवाल पूछा है कि हफ्ते में दो बार जब मुख्यमंत्री धामी हरिद्वार आते हैं तो वह आखिर करने क्या जाते हैं।
क्योंकि शहर हित के किसी भी मुद्दे को लेकर वह एक शब्द मुख्यमंत्री के सामने नहीं रखते न चर्चा नहीं करते, ना कोई मांग रखते हैं। आरोप लगाया कि वे सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए जाते हैं। कहा है कि पुलिस का मनोबल गिराने का काम बीजेपी से जुड़े लोगों को नहीं करना चाहिए सत्ता से जुड़े लोग ही अगर पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े करेंगे तो फिर राजकाज कैसे चलेगा।
चरणजीत पाहवा ने स्पष्ट किया कि पुलिस के जवानों का अपमान मनोबल गिराने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
————————————–
हेलीपैड का वीडियो वायरल हुआ और बहस छिड़ गई—क्या राजनीतिक सक्रियता अब ‘सेल्फी संस्कृति’ तक सिमट गई है? ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भाजपा नेता मनोज गौतम को लेकर भी ऐसी ही एक घटना सामने आई थी।



