“मांस-मछली बेचने वाले होटलों को शहर से बाहर करने के प्रस्ताव पर सियासी हलचल..
पार्षदों ने मेयर से मिलकर जताया विरोध, कहा—रोजगार और जनहित दोनों होंगे प्रभावित..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: नगर निगम की आगामी बोर्ड बैठक में मांस, मछली और अंडा बेचने वाले होटलों पर संभावित रोक के प्रस्ताव ने शहर की सियासत गरमा दी है। पार्षदों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए मेयर से इसे एजेंडे से हटाने की मांग की है।
नगर निगम क्षेत्र में मांस, मछली और अंडा बेचने वाले होटल-ढाबों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की चर्चा के बीच पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल मेयर किरण जैसल से मिला और ज्ञापन सौंपकर प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की। त्रिमूर्ति नगर वार्ड-44 के पार्षद अहसान अंसारी ने स्पष्ट किया कि कच्चे मांस की दुकानों को शहर से बाहर करने के प्रस्ताव का वे समर्थन करते हैं, लेकिन पके हुए भोजन पर रोक लगाना न तो व्यावहारिक है और न ही जनहित में। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से लाखों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित होंगी और हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।
पूर्व राज्य मंत्री हाजी नईम कुरैशी ने भी कहा कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए संतुलन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन होटल-ढाबों को शहर से बाहर करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे आजीविका के अधिकार से भी जोड़ा। पार्षद हाजी इरफान अंसारी ने सुझाव दिया कि साफ-सफाई और पारदर्शिता के नियमों को सख्ती से लागू कर दुकानों का संचालन सुनिश्चित किया जा सकता है। वहीं अन्य पार्षदों ने भी इसे भ्रम फैलाकर माहौल खराब करने की कोशिश करार दिया।
मेयर किरण जैसल ने आश्वासन दिया कि सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। मेयर प्रतिनिधि सुभाषचंद ने भी संवाद के जरिए समाधान निकालने की बात कही। ज्ञापन सौंपने वालों में मोमिन अंसार ज्वालापुर के सदर हाजी इरफान अंसारी, पार्षद अरशद ख्वाजा, पार्षद प्रतिनिधि शहाबुद्दीन अंसारी, पार्षद हिमांशु गुप्ता, विवेक भूषण विक्की, सुनील कुमार, अकरम अंसारी, आरिफ, वाजिद अली, पुनीत कुमार आदि शामिल रहे।



