
पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून/हरिद्वार: स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने प्रवीण वाल्मीकि गैंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने गैंग लीडर प्रवीण वाल्मीकि के भतीजे मनीष उर्फ बॉलर और उसके सहयोगी पंकज अष्टवाल को दबोचा है। जांच में सामने आया है कि गैंग लंबे समय से जमीन कब्जाने और पार्किंग ठेकों पर वर्चस्व के लिए सक्रिय था। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे करोड़ों की संपत्ति हड़प ली।
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हत्या से लेकर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तक….पुलिस के अनुसार, सुनहरा निवासी श्याम बिहारी की 2014 में मौत के बाद उनकी करोड़ों की संपत्ति पर कब्जे की साजिश रची गई। 2018 में संपत्ति देख रहे उनके भाई कृष्ण गोपाल की हत्या कर दी गई।
फिर 2019 में श्याम बिहारी की पत्नी रेखा पर दबाव बनाया गया और इनकार करने पर उनके भाई सुभाष पर मनीष बॉलर और साथियों ने गोली चला दी। इसके बाद परिवार क्षेत्र छोड़कर कहीं और चला गया। परिवार की गैर मौजूदगी में गैंग ने फर्जीवाड़े का सहारा लिया।
रेखा और स्नेहलता के नाम से नकली पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई गई और उन्हीं के जरिए करोड़ों की जमीन पंकज अष्टवाल के नाम कर दी गई, जिसे बाद में आगे बेच दिया गया।
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जेल से भी चल रहा था गैंग….जांच में सामने आया कि 2022 में हरिद्वार जेल में बंद रहने के दौरान प्रवीण वाल्मीकि और सुनील राठी ने एक और साजिश रची। कनखल क्षेत्र में बंदी संदीप उर्फ एरोन की तीन करोड़ से अधिक की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए मनीष बॉलर और संजय चांदना से एग्रीमेंट कराया गया।
हालांकि बाद में यही जानकारी जेल में बंद महंत हत्याकांड के आरोपी आशीष शर्मा उर्फ टुल्ली तक पहुंची। उसने यह बात सुनील राठी को बताई तो दबाव डालकर एग्रीमेंट रद्द करा दिया गया।
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गिरफ्तार आरोपी……
मनीष उर्फ बॉलर (40 वर्ष), निवासी ऋषिनगर, ग्राम सुनेहरा, रुड़की। पंकज अष्टवाल (30 वर्ष), निवासी ग्राम सुनेहरा, रुड़की।
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आगे की जांच…..एसटीएफ ने बताया कि दोनों से पूछताछ में फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाने वाले अन्य लोगों की जानकारी मिली है। उनकी भी जल्द गिरफ्तारी होगी। इसके अलावा गैंग से जुड़ी और संपत्ति कब्जे की घटनाओं की जांच तेज कर दी गई है।