अपराधउत्तराखंड

“कैदी पर बर्बरता की सजा: हाईकोर्ट ने उठाया सख्त कदम, डिप्टी जेलर और सिपाही को निलंबित करने के आदेश, अन्य अफसरों पर भी लटकी कार्रवाई की तलवार..

खबर को सुनें

पंच👊नामा-ब्यूरो
उत्तराखंड: सितारगंज जेल में बंद एक कैदी के साथ बर्बरता और अमानवीय व्यवहार के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की जांच रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने डिप्टी जेलर नवीन चौहान और कांस्टेबल राम सिंह कपकोटी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं।इतना ही नहीं, कोर्ट ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया है कि वे उन सभी अधिकारियों के नाम सामने रखें जो DLSA सचिव की मौजूदगी में कैदी से बातचीत के दौरान वहां मौजूद थे।

—————————————
मेकअप से छुपाई गईं चोटें, डर से कांपता मिला कैदी…..सितारगंज जेल में बंद कैदी सुभान की ओर से अधिवक्ता प्रभा नैथानी ने हाईकोर्ट में यह मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कैदी को लगातार शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है। कोर्ट के आदेश पर डीएलएसए सचिव ने जेल का औचक निरीक्षण किया, जहां कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।कैदी सुभान की आंखें लाल थीं, शरीर पर सूजन और जख्मों के निशान थे, जिन्हें मेकअप से ढकने का प्रयास किया गया था। कैदी ने बताया कि 28 जून को जेल स्टाफ ने उसे बेरहमी से पीटा। हालांकि, वह डर के कारण मारने वालों के नाम नहीं बता सका।
—————————————
डंडा पटक कर धमका रहा था सिपाही, सामने थे डीएलएसए सचिव…..निरीक्षण के दौरान कांस्टेबल राम सिंह कपकोटी डंडा पटकता हुआ धमकी दे रहा था, जिसे खुद DLSA सचिव ने देखा और रिपोर्ट में उल्लेख किया। इस रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने ADGP (कारागार) को कड़ा एक्शन लेने का आदेश दिया।
—————————————
खंडपीठ ने लिया स्वतः संज्ञान, कोर्ट में पेश किया जाएगा कैदी….मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि इस मामले में शामिल अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए। साथ ही कैदी सुभान को कोर्ट में पेश करने के भी आदेश दिए गए हैं।
—————————————
कानूनी रोशनी बने कृष्णकांत, जरूरतमंदों की आवाज़…..इस मामले को प्रकाश में लाने में लॉ एंड जस्टिस सोसाइटी के सदस्य कृष्णकांत की भूमिका बेहद सराहनीय रही। गरीब, वंचित और शोषित वर्ग के लोगों को वह मुफ्त कानूनी सलाह दे रहे हैं, जिससे कई लोगों को न्याय की रोशनी मिल रही है।
उनके प्रयासों से पीड़ितों की उम्मीदें जगी हैं, और न्याय की राह आसान हुई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Translate »