“लक्सर में धुरंधर कोतवाल, फिर भी बदमाश ही नहीं, आम ग्रामीण भी तोड़ रहे पुलिस का इकबाल..
पुलिसकर्मियों से मारपीट, वर्दी फाड़ने और धक्का-मुक्की की लगातार हो रही घटनाएं, कैसे होगा विश्वास बहाल..

पंच👊नामा-ब्यूरो
सुरेंद्र गुर्जर, लक्सर: लक्सर क्षेत्र में पुलिस का इकबाल लगातार कमजोर होता नजर आ रहा है। कोतवाली में धुरंधर प्रभारी की मौजूदगी के बावजूद हालात यह हैं कि अब सिर्फ बदमाश ही नहीं, बल्कि आम ग्रामीण भी खाकी वर्दी पर हाथ उठाने से नहीं हिचक रहे हैं। बीते कुछ महीनों में पुलिस पर हमले, मारपीट, वर्दी फाड़ने और धक्का-मुक्की की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ताजा मामला बुधवार का है, जब पेशी पर लाए जा रहे एक बदमाश पर अति व्यस्त रेलवे ओवरब्रिज पर दिनदहाड़े फायरिंग की गई। बाइक सवार हमलावरों ने पुलिस वाहन को निशाना बनाया। वाहन में छह पुलिसकर्मी मौजूद थे, इसके बावजूद बदमाश को तीन गोलियां लगीं। इस घटना ने बदमाशों के हौसलों और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया।
इससे पहले 13 दिसंबर को देहरादून से लक्सर लौट रहे कोतवाली के पुलिसकर्मी वीरेंद्र सिंह पर सेठपुर गांव के पास ट्रैक्टर सवार दो लोगों ने साइड देने को लेकर हमला कर दिया। इस दौरान पुलिसकर्मी की वर्दी तक फाड़ दी गई।
23 अक्टूबर को मुंडाखेड़ा खुर्द गांव में विवाद की सूचना पर पहुंचे पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौच और मारपीट की गई। वहां भी वर्दी फाड़ने की घटना सामने आई। 30 अगस्त को खानपुर थाना क्षेत्र के मोहनवाला गांव में विवाद सुलझाकर लौट रहे पुलिसकर्मियों पर एक व्यक्ति ने कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था। इस दौरान एक दरोगा के हाथ पर दांत से काटने का भी आरोप है।
इसी तरह 9 सितंबर को रायसी क्षेत्र में शराब के नशे में हुड़दंग कर रहे युवक को गिरफ्तार कर कोतवाली लाते समय उसके परिजन ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौच की। आरोपित को छुड़ाने का प्रयास भी किया गया।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से साफ है कि लक्सर क्षेत्र में खाकी का खौफ कम होता जा रहा है।
कभी जिस वर्दी को देखकर लोग सहम जाया करते थे, अब उसी वर्दी को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस पर हो रहे हमलों का सिलसिला कानून-व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। ऐसे में सभ्य नागरिकों के मन में यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पुलिस का इकबाल क्यों कमजोर पड़ रहा है और इसे बहाल करने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।



