“अंकिता भंडारी प्रकरण में सरकार ने आखिरकार सीबीआई जांच को दी मंजूरी, सीएम धामी ने कहा, न्याय से कोई समझौता नहीं..

पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून: अंकिता भंडारी प्रकरण में लंबे समय से उठ रही सीबीआई जांच की मांग पर आखिरकार राज्य सरकार ने मुहर लगा दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता-पिता के अनुरोध और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए मामले की सीबीआई जांच कराने की संस्तुति प्रदान की है। इस फैसले को सरकार की ओर से बड़ा और संवेदनशील कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शुरू से लेकर अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है और आगे भी यही प्रतिबद्धता रहेगी। उन्होंने कहा कि अंकिता के साथ हुई घटना की जानकारी मिलते ही सरकार ने बिना विलंब कार्रवाई की और मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रकरण से जुड़े सभी आरोपितों को तत्काल गिरफ्तार किया गया। सरकार की ओर से सशक्त पैरवी की गई, जिसका परिणाम यह रहा कि विवेचना और ट्रायल के दौरान किसी भी आरोपित को जमानत नहीं मिल सकी। गहन जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया और निचली अदालत में सुनवाई पूरी होने पर आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
उन्होंने कहा कि यह पूरे मामले में इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ ऑडियो क्लिप को लेकर अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनकी जांच लगातार जारी है। सरकार किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं करेगी।
लगातार उठती रही सीबीआई जांच की मांग…..
गौरतलब है कि अंकिता भंडारी मामले में शुरू से ही सीबीआई जांच की मांग उठती रही है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय संगठनों ने लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। अंकिता के परिजन भी पहले दिन से सीबीआई जांच की मांग दोहराते रहे।
बीते कई दिनों से प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे। जनदबाव और आंदोलन को देखते हुए आखिरकार सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा। वहीं, मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थी, वह समाज की बेटी और बहन थी। हाल ही में अंकिता के माता-पिता से मुलाकात के दौरान उन्होंने सीबीआई जांच का अनुरोध किया, जिसे सरकार ने गंभीरता से लेते हुए स्वीकार कर लिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला न केवल परिजनों की भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है, बल्कि सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक बन रहे माहौल का भी सीधा असर है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार पहले भी न्याय के लिए प्रतिबद्ध थी और आगे भी पूरी दृढ़ता और संवेदनशीलता के साथ अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संकल्पबद्ध रहेगी।



