“भगवानपुर बवाल, ऋषिकेश व देहरादून की हत्याओं में तीन दारोगाओं पर गिरी गाज, सात दिन में जांच कर रिपोर्ट देंगे आईपीएस अधिकारी..
प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर को लेकर पुलिस मुख्यालय में हुई हाई लेवल समीक्षा बैठक, डीजीपी दीपम सेठ ने जताई नाराजगी, कसे पेंच, (देखें वीडियो)

पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था और हालिया गंभीर आपराधिक घटनाओं को लेकर पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को हाई लेवल समीक्षा बैठक हुई।
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए तीन उप निरीक्षकों को निलंबित कर दिया गया। डीजीपी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अपराध नियंत्रण, महिलाओं के खिलाफ अपराध, भूमि विवाद और पुलिस कर्मियों की कार्यशैली में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में गढ़वाल व कुमाऊं मंडल के रेंज प्रभारी, सभी जिलों के पुलिस कप्तान, एसटीएफ और पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान अपराधों की स्थिति, विवेचनाओं की प्रगति और जनशिकायतों के निस्तारण की विस्तार से समीक्षा की गई।
महिला हत्याकांडों में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई….
देहरादून जिले में हाल में हुई दो जघन्य हत्याओं को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी ने कड़ा एक्शन लिया। ऋषिकेश में महिला की गोली मारकर हत्या के मामले में लापरवाही सामने आने पर एम्स चौकी प्रभारी उप निरीक्षक साहिल वशिष्ट को निलंबित किया गया।
वहीं कोतवाली नगर क्षेत्र में युवती की निर्मम हत्या के प्रकरण में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर खुड़बुड़ा चौकी प्रभारी उप निरीक्षक प्रद्युम्न नेगी को भी निलंबित कर दिया गया।
दोनों मामलों की जांच एसपी क्राइम विशाखा अशोक भदाणे को सौंपी गई है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि घटनाओं में अन्य पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच कर सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपी जाए।
भगवानपुर बवाल में भी गिरी गाज…..
हरिद्वार जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र में रविदास जयंती के दौरान दो पक्षों के बीच हुए संघर्ष और गोलीबारी की घटना को भी डीजीपी ने गंभीर लापरवाही माना। इस मामले में चुड़ियाला हल्का प्रभारी उप निरीक्षक सूरत शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। पूरे प्रकरण की जांच एसपी क्राइम हरिद्वार जितेंद्र मेहरा को सौंपी गई है। यहां भी अन्य कर्मियों की भूमिका की जांच कर सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
लैंड फ्रॉड पर नए निर्देश…..
ऊधमसिंहनगर के सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले का जिक्र करते हुए डीजीपी ने भूमि विवादों में पुलिस की भूमिका को लेकर सख्त निर्देश जारी किए। अब भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की प्रारंभिक जांच अनिवार्य रूप से क्षेत्राधिकारी स्तर पर होगी।
जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि मामला सिविल प्रकृति का है या आपराधिक। इसके बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लंबित भूमि मामलों की लगातार निगरानी पुलिस मुख्यालय स्तर से की जाएगी।
सिविल मामलों में दखल और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस…..
डीजीपी ने चेतावनी दी कि सिविल मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। साथ ही भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सतर्कता विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त पुलिस कर्मियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाई जाए।
बैठक के दौरान डीजीपी ने साफ कहा कि जनता का भरोसा बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसमें चूक करने वालों पर बिना किसी दबाव या लिहाज के कार्रवाई होगी।



