“उत्तराखंड पुलिस के जवान ने अंजान महिला की जान बचाने के लिए तोड़ा रोज़ा, रक्तदान कर पेश की इंसानियत की मिसाल..

पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून: रमज़ान के पाक महीने में इंसानियत और फ़र्ज़ की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। उत्तराखंड पुलिस के एक जवान ने रोज़ा होने के बावजूद एक अंजान महिला की जान बचाने के लिए अपना रोज़ा तोड़कर रक्तदान किया और यह दिखा दिया कि इंसानियत सबसे बड़ी इबादत है।
23 फरवरी को पुलिस लाइन देहरादून में तैनात हेड कांस्टेबल इमरान अली को एक व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए इत्तला मिली कि उत्तरकाशी के रहने वाले एक शख्स की बीवी हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में नाज़ुक हालत में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने फौरन खून की ज़रूरत बताई थी। मामला बेहद संगीन था और हर लम्हा कीमती साबित हो रहा था।
उस वक़्त इमरान अली रोज़े से थे। रमज़ान में रोज़ा रखना मुसलमानों के लिए बेहद अहम इबादत मानी जाती है, लेकिन जैसे ही उन्हें यह खबर मिली, उन्होंने हालात की नज़ाकत को समझा और बिना किसी ताख़ीर के अस्पताल जाने का फैसला किया। उन्होंने इंसानी जान को तरजीह दी और अस्पताल पहुंचकर रोज़ा खोलते हुए रक्तदान किया।
वक़्त पर खून मिलने से मरीज का इलाज शुरू हो सका और उसकी हालत में सुधार आया। परिजनों के चेहरों पर मायूसी की जगह उम्मीद और सुकून नजर आया। उन्होंने दून पुलिस और खास तौर पर हेड कांस्टेबल इमरान अली का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया। उनका कहना था कि आज के दौर में जहां लोग अक्सर अपने तक सीमित रह जाते हैं, वहां एक पुलिसकर्मी का इस तरह आगे आना काबिले-तारीफ है।
यह वाकया सिर्फ एक रक्तदान की कहानी नहीं, बल्कि खिदमत, जज़्बे और जिम्मेदारी की जीती-जागती मिसाल है। इससे यह पैग़ाम भी जाता है कि वर्दी सिर्फ कानून लागू करने का प्रतीक नहीं, बल्कि रहमदिली और समाज सेवा का भी निशान है। सच तो यह है कि ऐसे किरदार ही पुलिस की साख को और मज़बूत बनाते हैं।



