“ठेकेदार ने नहीं दी छुट्टी तो मजदूरों ने एआई से शेर की वीडियो बनाकर गांव में कर दी वायरल, मचा हड़कंप..
आचार्य बालकृष्ण के अकाउंट पर साझा हुआ वीडियो, खोजबीन करता रहा वन विभाग, माथा खुजाते रहे अफसर..

पंच👊नामा-ब्यूरो
ऋषिकेश: डिजिटल युग में छुट्टी पाने के तरीके भी अब हाईटेक हो चले हैं। यमकेश्वर क्षेत्र के माला गांव में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब धन्वंतरी धाम के आसपास बब्बर शेर के घूमने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो सामने आते ही गांव में दहशत का माहौल बन गया। लोग घरों में दुबक गए, मोबाइल कैमरे चालू हो गए और जंगल से गांव तक सिर्फ एक ही चर्चा होने लगी— “शेर आया… शेर आया…”
वीडियो इतना वास्तविक प्रतीत हो रहा था कि खुद ठेकेदार भी भ्रम में आ गया और गांव में शेर आने की बात कह दी। डर के कारण काम कर रहे श्रमिकों ने कुछ दिनों के लिए घर लौटने की इच्छा जता दी, जिससे काम पूरी तरह ठप हो गया। उधर, वायरल वीडियो ने वन विभाग की नींद उड़ा दी।
मामला तब और गंभीर हो गया, जब यह वीडियो पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण के सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा कर दिया गया। इसके बाद वन विभाग हरकत में आ गया। अधिकारी यह सोचकर हैरान थे कि जिस क्षेत्र में बब्बर शेर पाया ही नहीं जाता, वह धन्वंतरी धाम कैसे पहुंच गया।
शनिवार को लालढांग रेंज और राजाजी टाइगर रिजर्व की टीमों ने मौके पर पहुंचकर खोजबीन शुरू की। गांव और जंगल की खाक छानने के बाद जब श्रमिकों से सख्ती से पूछताछ की गई, तो शेर की दहाड़ की सच्चाई सामने आ गई।
जांच में पता चला कि ठेकेदार से छुट्टी न मिलने पर एक मजदूर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से शेर की फोटो और वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी थी। न तो गांव में कोई शेर आया था और न ही जंगल में कोई हलचल हुई थी।
लैंसडौन वन प्रभाग के एसडीओ सुधीर कुमार ने बताया कि जांच में वीडियो फर्जी पाया गया है। यह एआई से तैयार किया गया था, जिससे गांव में भ्रम और दहशत का माहौल बन गया।
अब हालात सामान्य हैं। शेर गायब है, जंगल शांत है और वन विभाग ने राहत की सांस ली है। लेकिन यह मामला यह जरूर बता गया कि आज के दौर में छुट्टी के लिए बहाने नहीं, एआई का सहारा लिया जा रहा है।



