“राजनीति और व्यापार छोड़कर बाबा क्यों बन रहे लोग, 20 साल पुराना रिकॉर्ड खंगालने की मांग..
ऑपरेशन में भीख मांगने वाले कमजोर बेसहारा पर कार्रवाई, देवभूमि भैरव सेवा संगठन ने उठाए सवाल..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: काल्पनिक बाबाओं और भगवा धारण कर संत बनने के बढ़ते मामलों को लेकर देवभूमि भैरव सेवा संगठन ने सवाल खड़े किए हैं। संगठन का कहना है कि आज यह जरूरी हो गया है कि राजनीति और व्यापार छोड़कर अचानक बाबा बने लोगों के कम से कम 20 वर्ष पुराने रिकॉर्ड की जांच कराई जाए,
ताकि यह साफ हो सके कि उनकी मंशा क्या है और वे किस उद्देश्य से भगवा धारण कर रहे हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन के तथाकथित ऑपरेशन में भीख मांगने वाले कमजोर, बुजुर्ग और बेसहारा लोगों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि धर्म की आड़ में गलत गतिविधियों में लिप्त लोगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह स्थिति न्यायसंगत नहीं है और इससे समाज में गलत संदेश जा रहा है।
देवभूमि भैरव सेवा संगठन के प्रदेश सचिव चरणजीत पाहवा ने कहा कि संन्यास जीवन कोई आसान रास्ता नहीं है। इसके लिए त्याग, तपस्या और गुरु सेवा की कठोर परंपरा रही है। आज जिस तरह गृहस्थ जीवन, राजनीति और व्यापार से जुड़े लोग अचानक संत बनने का दावा कर रहे हैं, वह उन महान तपस्वी संतों का अपमान है जिन्होंने जीवन भर साधना का मार्ग अपनाया।
उन्होंने कहा कि कई तथाकथित बाबा बड़े आश्रमों और अखाड़ों में अपनी जगह बनाने की नीयत से संत का चोला ओढ़ रहे हैं। ऐसे लोगों पर कार्रवाई जरूरी है, न कि ठंड और बारिश में सड़कों पर जीवन गुजार रहे गरीब बुजुर्गों पर। संगठन ने मांग की कि सरकार बेसहारा लोगों के लिए रैन बसेरा, भोजन और संरक्षण की स्थायी व्यवस्था करे।
संगठन ने प्रशासनिक कार्रवाई की तुलना अतिक्रमण अभियानों से करते हुए कहा कि जैसे पक्के कब्जों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है और कच्चे कब्जों पर कार्रवाई होती है, उसी तरह यहां भी कमजोर वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है। अंत में देवभूमि भैरव सेवा संगठन ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि ऐसे अभियानों पर पुनर्विचार किया जाए, धर्म के नाम पर हो रही कथित लूट पर सख्ती हो और राजनीति व व्यापार छोड़कर बाबा बने लोगों की पृष्ठभूमि की गहन जांच कराई जाए।



