“मोहनदास मामले की सीबीआई जांच में कौन लगा रहा अड़ंगा, दिल्ली तक दौड़ लगाने वाले संत कौन..?
हाइकोर्ट की सख्ती के बाद फिर बोतल से बाहर आया जिन्न, बाबा रामदेव के गुरु शंकरदेव सहित आखिर कहां गायब हो गए अनगिनत संत..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: आठ साल पहले रहस्यमयी हालात में लापता हुए अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता और बड़ा अखाड़ा के महंत मोहनदास को खोजने की मांग धर्म जगत से लगातार उठती आ रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि हाइकोर्ट के आदेश पर शुरू होने वाली सीबीआई जांच में कुछ संत ही रुकावट डालने का प्रयास कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि कुछ संत फौरी तौर पर सीबीआई जांच रुकवाने की जोड़-तोड़ में जुटे हैं। इतना ही नहीं, नैनीताल हाइकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि वे कौन लोग हैं और क्यों नहीं चाहते कि मोहनदास के लापता होने का राज सबके सामने आए। बहरहाल, हाइकोर्ट के आदेश के बाद संतों में अंदरूनी तौर पर हलचल मची हुई है।
मुंबई के लिए निकले थे मोहनदास…..
बड़ा अखाड़ा के कोठारी महंत मोहनदास 16 सितंबर, 2017 को हरिद्वार से मुंबई के लिए ट्रेन से निकले थे और रास्ते में रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गए। तीसरे दिन हरिद्वार के कनखल थाने में गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मेरठ, दिल्ली, अलीगढ़, मथुरा व आगरा रेलवे स्टेशनों पर जाकर पड़ताल की। महंत मोहनदास के मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन मेरठ निकली थी।
जिसके बाद उत्तराखंड पुलिस, एसटीएफ और उत्तर प्रदेश पुलिस व एसआइटी की टीम करीब एक महीने तक खोजबीन करती रही। लेकिन इन आठ साल में कोई ठोस सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा। समय-समय पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व अन्य संगठनों की बैठकों में महंत मोहनदास के लापता होने का मुद्दा उठता रहा है। लापता होने के पीछे धार्मिक संपत्तियों के विवाद से लेकर यह चर्चाएं भी होती रहीं कि महंत मोहनदास ने फर्जी संतों की सूची तैयार करने में अखाड़ा परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की मदद की थी, इसलिए उनका अपहरण कर लिया गया।
महंत सुखदेव मुनि की ओर से नैनीताल हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया कि आठ साल बीत जाने के बाद भी, राज्य की जांच एजेंसी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं और जांच बहुत लापरवाही से की गई है। महंत का मोबाइल फोन रवि नामक व्यक्ति से बरामद हुआ, मगर जांच अधिकारी ने महंत के ठिकाने के बारे में उससे पूछताछ नहीं की। राज्य केवल बार-बार जांच को एक विवेचक से दूसरे विवेचक को स्थानांतरित कर रहा है, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला है।
हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसियों की निष्क्रियता के कारण, निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि मामले को सीबीआई को सौंपा जाए।
कौन लगा रहा दिल्ली तक दौड़….!
हाइकोर्ट का आदेश आने के बाद से संतों के एक धड़े में खलबली मची हुई है। सूत्र बताते हैं कि एक धड़े का नेतृत्व करने वाले संत तुरंत सीबीआई जांच रुकवाने के लिए दिल्ली तक दौड़ लगा चुके हैं। उनकी किन-किन लोगों से मुलाकात हुई है, क्या-क्या विमर्श हुआ है, इसको लेकर कई तरह की चर्चाएं बनी हुई हैं। महंत मोहनदास कहां हैं, क्यों गायब हुए, क्या उनका अपहरण हुआ, या किसी अनहोनी का शिकार हुए, गायब होेने के पीछे कोई गहरी साजिश तो नहीं, इन सारे सवालों के जवाब सीबीआई जांच से ही संभव हैं।
बाबा रामदेव के गुरु भी लापता….
जुलाई 2007 में बाबा रामदेव के गुरु, स्वामी शंकर देव, हरिद्वार के कनखल में सुबह की सैर के दौरान रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे। वह 16 जुलाई, 2007 को अपनी सामान्य सैर पर निकले थे और कभी वापस नहीं लौटे। इस घटना के बाद पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की गई, बाद में सीबीआई जांच भी हुई, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल सका। ऐसे कई अन्य संतों की गुमशुदगियां पुलिस की फाइलों में धूल फांक रही हैं।



