“हरिद्वार में सनातन परंपरा का ऐतिहासिक क्षण: पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महामंडलेश्वर बने जापान के संत स्वामी आदित्यानंद पुरी..
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज के संयोजन में हुआ समारोह, देश भर के संत रहे मौजूद..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: देवभूमि उत्तराखंड की पावन तीर्थनगरी हरिद्वार में सोमवार को सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा का भव्य और ऐतिहासिक साक्ष्य देखने को मिला। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के तत्वावधान में एस.एम.जे.एन. पी.जी. कॉलेज परिसर में महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह वैदिक विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर देश–विदेश से पहुंचे संत–महात्मा, विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि, विद्वान आचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
समारोह में जापान के संत स्वामी आदित्यानंद पुरी को श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी का महामंडलेश्वर पद प्रदान किया गया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में संत समाज ने चादर विधि और पुष्प वर्षा के साथ अभिषेक संपन्न कराया।
श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर पद सनातन धर्म में त्याग, तपस्या और गुरु कृपा का सर्वोच्च प्रतीक है। यह केवल धार्मिक सम्मान नहीं, बल्कि धर्म रक्षा, समाज मार्गदर्शन और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का दायित्व भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि स्वामी आदित्यानंद पुरी अखाड़े की परंपराओं के अनुरूप जापान में सनातन धर्म संस्कृति का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे।
पट्टाभिषेक समारोह की अध्यक्षता करते हुए जूना अखाड़े के सभापति श्रीमहंत प्रेमगिरी महाराज ने कहा कि संत समाज युगों से सनातन संस्कृति की पताका विश्वभर में फहरा रहा है और आज पूरी दुनिया इस संस्कृति को अपना रही है। महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी महाराज, श्रीमहंत महेश पुरी और श्रीमहंत दर्शन भारती ने कहा कि स्वामी आदित्यानंद पुरी जापान सहित विश्व में सनातन परंपरा से लोगों को जोड़ने का कार्य करेंगे।
महामंडलेश्वर पद ग्रहण करने के बाद स्वामी आदित्यानंद पुरी महाराज ने कहा कि श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी का महामंडलेश्वर बनना उनके लिए गौरव का विषय है। वे अखाड़े की मर्यादाओं का पालन करते हुए सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।
इस अवसर पर श्रीमहंत प्रेमगिरी, महंत दर्शन भारती, महंत ललितानंद गिरी, महंत राजगिरी, स्वामी अर्जुनपुरी, स्वामी संतोषानंद गिरी, स्वामी परमेश्वर दास, गुरु माता, एस.एम.जे.एन. कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार बत्रा, शिक्षकगण तथा जापान से आए सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।



