“परम गुरु हुज़ूर डॉ. मकुंद बिहारी लाल साहब की जयंती पर “पूर्ण मानव” की शिक्षा-दृष्टि को किया गया नमन..
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में संस्थापक दिवस (Founders Day) का भव्य आयोजन..

पंच👊नामा
ज्योति एस | नई दिल्ली/आगरा: आगरा स्थित राधास्वामी सत्संग दयालबाग में 31 जनवरी को परम गुरु हुज़ूर डॉ. मकुंद बिहारी लाल साहब की जयंती एवं दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) का संस्थापक दिवस श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया।
यह दिन DEI में Founders Day के रूप में मनाया जाता है। डॉ. लाल साहब राधास्वामी मत के सातवें श्रद्धेय अधिष्ठाता, DEI के संस्थापक निदेशक तथा इसकी शिक्षा नीति (1975) के मुख्य शिल्पकार थे।
डी.एससी. (एडिनबर्ग विश्वविद्यालय) से विभूषित डॉ. एम.बी. लाल साहब एक प्रख्यात शिक्षाविद्, शोधकर्ता और शिक्षक रहे। उन्होंने 1968 से 1971 तक लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में भी उल्लेखनीय सेवाएँ दीं।
उनके दूरदर्शी नेतृत्व में दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई, जिसे 16 मई 1981 को भारत सरकार ने यूजीसी अधिनियम की धारा-3 के अंतर्गत ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा प्रदान किया। बाद में संस्थान को भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) की सदस्यता भी मिली।
डॉ. लाल साहब द्वारा प्रतिपादित DEI शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य “पूर्ण मानव” का निर्माण है। यह नीति बौद्धिक विकास के साथ-साथ नैतिकता, सत्यनिष्ठा, श्रम-संस्कार, वैज्ञानिक
दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर बल देती है। इस शिक्षा दर्शन ने 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नई शिक्षा नीति 2020 को भी प्रेरित किया।
संस्थापक दिवस को ‘ओपन डे’ के रूप में मनाया गया, जिसमें DEI परिसर और इसके देश-विदेश के डिस्टेंस लर्निंग सेंटर्स में विविध शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित हुईं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंजीनियरिंग, कृषि, डेयरी, संगीत, चेतना अध्ययन सहित अनेक क्षेत्रों में छात्रों की परियोजनाओं की आकर्षक प्रदर्शनियाँ लगीं।
यह आयोजन एक “जीवंत प्रयोगशाला” के रूप में उभरा, जहाँ मूल्य-आधारित शिक्षा, आध्यात्मिकता और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिला। समारोह ने DEI के आदर्श वाक्य “Excellence with Relevance” को सशक्त रूप से दोहराया और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा की रोशनी पहुँचाने के संकल्प को मजबूत किया।



