उत्तरप्रदेश

बसंतोत्सव में जिम्नास्टिक्स 2026 का भव्य प्रदर्शन, दयालबाग में कौशल और अनुशासन का अद्भुत संगम..

परमपूज्य गुरु महाराज प्रो. प्रेम सरन सत्संगी की उपस्थिति में नवयुवकों -नवयुवतियों ने हैरतअंगेज करतबों से बांधा समां, 580 से अधिक केंद्रों पर हुआ लाइव प्रसारण..

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पंच👊नामा
ज्योति एस, आगरा: दयालबाग में बसंतोत्सव के अवसर पर आयोजित जिम्नास्टिक्स 2026 का आयोजन बुधवार को अत्यंत भव्य, अनुशासित और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। दयालबाग के जिम्नास्टिक्स ग्राउंड पर आयोजित इस कार्यक्रम में परमपूज्य गुरु महाराज प्रो. प्रेम सरन सत्संगी की गरिमामय उपस्थिति ने प्रतिभागियों और दर्शकों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह मार्च पास्ट और बैनर प्रदर्शन के साथ हुआ। इसके बाद सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक मोबिलाइजेशन अभ्यास किया। आगे-पीछे की रोलिंग, संयुक्त रोलिंग, क्रो वॉक, ब्रिज फॉर्मेशन, हैंड स्टैंड, कार्ट व्हील, सिंगल हैंड कार्ट व्हील, स्लो हैंड स्प्रिंग और हैंड स्टैंड ओवर रोल जैसे करतबों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।जिम्नास्टिक्स प्रदर्शन में दृष्टि, निज, शब्द, प्रेम, अनमोल, यश, निमित, आरत, बिंती, विधि, आदि, चेतन, अपार, शुभांशु, कोमल, अक्षय सिंह, ज्योति और सोहंग सत्संगी सहित अनेक प्रतिभागियों ने पैरेलल बार, हॉरिजॉन्टल बार, रस्सी चढ़ाई, रिंग्स और जंप्स (बैक फ्लिप, समर सॉल्ट, टाइगर जंप) में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। दो से आठ बालकों तक के पिरामिड और एक्रोबैटिक जिम्नास्टिक्स ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।कार्यक्रम की एक खास झलक सुसज्जित ऊंटों की सहभागिता रही, जिसने आयोजन को अनोखा और यादगार बना दिया। इसके साथ ही सरलीकृत योगासन श्रृंखला में पद्मासन, शीर्षासन और मयूरासन सहित विभिन्न आसनों का सामूहिक प्रदर्शन हुआ, जिसमें शारीरिक संतुलन के साथ आध्यात्मिक अनुशासन की स्पष्ट झलक दिखाई दी।हर करतब पर दर्शकों की तालियों की गूंज खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाती रही। पूरा आयोजन अनुशासन, समर्पण और सामूहिक भावना का सशक्त उदाहरण बना। अंत में प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और सभी को प्रसाद वितरित किया गया।उल्लेखनीय है कि यह पूरा आयोजन दयालबाग के ई-सत्संग केसकेड के माध्यम से देश-विदेश के 580 से अधिक केंद्रों पर लाइव प्रसारित हुआ, जिससे बड़ी संख्या में सत्संगी जुड़े। बसंत की बहार के बीच जिम्नास्टिक्स का यह आयोजन दयालबाग में आस्था, कौशल और सामूहिक चेतना का अनुपम संगम बनकर सामने आया।

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