हरिद्वार

“गोविंदा की कृपा के बिना नहीं होगा नक्शा पास, प्राधिकरण की चौखट पर घिस जायेगी जूते चप्पल, प्रॉपर्टी डीलर, आर्किटेक्ट भी गोविंदा दरबार में नतमस्तक, जलवा हो तो गोविंदा जैसा, पूरा सिस्टम जूते की नोंक पर..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: कहा जाता है कि ईश्वर कृपा जिस पर हो जाए उसकी बल्ले बल्ले हो जाती है ठीक वैसे ही एक प्राधिकरण में भी अब गोविंदा की कृपा के बिना सब-कुछ अधूरा है। अगर गोविंदा खुश नहीं हुए तो आमजन का अपने सपनों के घर का ख्वाब अधूरा ही रह जाएगा। यही नहीं प्रॉपर्टी डीलर आर्किटेक्ट्स भी गोविंदा का आशीर्वाद मिलने पर ही फल फूल सकेंगे, जी हां गोविंदा ने अपने दरबार में हाजिरी लगाने की बाबत आदेश जारी कर दिए है। यदि कृपा नहीं हुई तो प्राधिकरण के चौखट पर जूते चप्पल ही घिसना नसीब में आना तय है।आजकल सूबे के एक प्राधिकरण में गोविंदा नाम की माला हर कोई जप रहा है। प्राधिकरण का कोई कर्मचारी भी गोविंदा की कृपा के बिना अधूरा ही है। यही हकीकत है। गोविंदा का वजूद खत्म हो चुका था, लेकिन चंद रोज पहले बदले निजाम के बाद गोविंदा एक बार फिर प्राधिकरण प्रकट हुए हैं ।अपने आप को प्राधिकरण की हर विधा में एक्सपर्ट के तौर पर पेश करने वाले गोविंदा ही मौजूदा समय में मुख्य सलाहकार से लेकर कर्ता-धर्ता होने का दावा कर रहे है। पढ़े लिखे इंजीनियर भी गोविंदा की क्लास में सुबह-शाम हाजिरी लग रहे हैं क्योंकि गोविंदा की कृपा जिस पर होगी उसी की ही प्राधिकरण में बल्ले बल्ले होगी। यदि किसी पर गोविंदा ने अपनी भौहें चढ़ा ली तो फिर उसका भविष्य अंधकारमय होना तय है। प्राधिकरण के सिस्टम से जुड़े चेहरों को ही केवल गोविंदा के दरबार में नतमस्तक होना पड़ रहा है बल्कि, शहर के प्रॉपर्टी डीलर से लेकर आर्किटेक्ट भी अब गोविंदा की चरण वंदना कर रहे है। प्रभु का संदेश पूरी तरह साफ है कि उनके आशीर्वाद के बिना प्रसाद हिस्से में नहीं आएगा। ऐसे में गोविंदा का नाम भजना जरूरी हो गया है, आमजन भी प्राधिकरण के चक्कर लगा लगा थक गए हैं लेकिन उन्हें यह नहीं समझ आ रहा की आखिर उनके सपनों के घर का नक्शा क्यों और कहां अटका हुआ है। लुप्त होने के बाद अचानक प्रकट हुए गोविंदा प्रभु ने शहर के प्रॉपर्टी डीलरों को आर्किटेक्ट को दो टूक कहा है कि बिना उसकी मंजूरी के उनका नक्शा किसी भी सूरत में नहीं पास हो सकता है । दावा किया जाता है कि प्राधिकरण की मास्टर चाभी अब वह ही है, लिहाजा जैसा वह चाहे उन्हें अब उन्हें वैसा करना ही पड़ेगा,वरना नुकसान तय है। गोविंदा पर चढ़त भी बेहद मोटी होती है क्योंकि आखिर वह प्रभु गोविंद जो ठहरे।

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