“SIR में विधायक फुरकान अहमद के नाम पर आपत्ति, कलियर विधानसभा क्षेत्र का निवासी होने पर सवाल.!
जिसके नाम से आपत्ति दर्ज, उसी ने किया साफ इनकार; ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से मिले विधायक, पूरे मामले की जांच की मांग..

पंच👊नामा
पिरान कलियर; विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच कलियर विधानसभा क्षेत्र में विधायक हाजी फुरकान अहमद के नाम पर दर्ज एक आपत्ति ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। आपत्ति में विधायक के कलियर विधानसभा क्षेत्र का निवासी होने पर सवाल उठाया गया है,
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब जिस व्यक्ति के नाम से आपत्ति दर्ज होना बताया जा रहा है, उसी ने आपत्ति से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, कथित आपत्तिकर्ता ने अपने इनकार के समर्थन में शपथ पत्र भी दाखिल कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक SIR प्रक्रिया के दौरान बूथ संख्या 121 के निवासी मो. फुरकान के नाम से विधायक हाजी फुरकान अहमद के संबंध में आपत्ति दर्ज की गई। आपत्ति में विधायक को कलियर विधानसभा क्षेत्र का निवासी नहीं बताया गया है। मामला सामने आने के बाद जब मो. फुरकान से इस संबंध में जानकारी ली गई
तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने विधायक के खिलाफ किसी तरह की आपत्ति दर्ज नहीं कराई है। मो. फुरकान के मुताबिक न तो उन्होंने कोई आपत्ति दी और न ही विधायक के नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किसी प्रकार की कार्रवाई की। उन्होंने अपने पक्ष को स्पष्ट करने के लिए बाकायदा शपथ पत्र दाखिल कर आपत्ति दर्ज कराने से इनकार किया है।
कथित आपत्तिकर्ता के इस इनकार के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मो. फुरकान ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई तो उनके नाम से विधायक के खिलाफ आपत्ति आखिर किसने दर्ज कराई? साथ ही SIR के दौरान आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति की सहमति और दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह हुआ, यह भी जांच का विषय बन गया है।
विधायक हाजी फुरकान अहमद का कहना है कि उन्हें SIR प्रक्रिया के तहत अपने नाम पर आपत्ति दर्ज होने की जानकारी मिली है। आपत्ति में उन्हें कलियर विधानसभा क्षेत्र का निवासी नहीं बताया गया, जबकि जिस व्यक्ति के नाम से आपत्ति दर्ज होना बताया जा रहा है, वही व्यक्ति आपत्ति से इनकार कर रहा है और शपथ पत्र भी दे चुका है।
मामले को लेकर विधायक फुरकान अहमद की ओर से ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से मुलाकात भी की गई है। इसके बाद अब प्रशासनिक स्तर पर SIR से जुड़े दस्तावेजों और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया की जांच किए जाने की उम्मीद है। जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी कि आपत्ति वास्तव में किसने दर्ज कराई, उसके लिए कौन से दस्तावेज इस्तेमाल हुए और कथित आपत्तिकर्ता के नाम का इसमें किस तरह इस्तेमाल हुआ।
फिलहाल विधायक के नाम पर दर्ज आपत्ति और कथित आपत्तिकर्ता के शपथ पत्र ने SIR प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं, जिसके बाद ही इस पूरे मामले की असल तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।



