“पिरान कलियर में धूमधाम से मनाया गया जश्न-ए-गौसुल आजम, चादरपोशी के साथ मांगी गई मुल्क की खुशहाली की दुआ..
खानकाह-ए-शराफतिया सकलैनियां के गद्दीनशीन शाह गाजी मियां ने की शिरकत, नातख्वानों के कलाम पर झूमे अकीदतमंद..

पंच👊नाम
पिरान कलियर; सूफियाना नगरी पिरान कलियर एक बार फिर रूहानी रंग में रंगी नजर आई। मौका था अंजुमन गुलामाने मुस्तफा सोसायटी की ओर से आयोजित जश्न-ए-गौसुल आजम (ग्यारहवीं शरीफ) का, जहां बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर अपनी अकीदत का इजहार किया।
कार्यक्रम में बरेली शरीफ की खानकाह-ए-शराफतिया सकलैनियां के गद्दीनशीन शाह गाजी मियां मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अकीदतमंदों ने फूल मालाओं से उनका गर्मजोशी से इस्तकबाल किया।
इसके बाद साबरी कायनात पैलेस, दरगाह बाबा जिलानी से जुलूस की शक्ल में शाह गाजी मियां, साहिबजादा शाह यावर मियां, सूफी राशिद अली साबरी, हाजी गुलशाद सिद्दीकी, खादिम मुनव्वर अली साबरी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद दरबार-ए-साबरी पहुंचे।
दरबार-ए-साबरी में चादरपोशी कर अकीदत के फूल पेश किए गए। इस मौके पर शाह यावर एजाज कुद्दुसी साबरी ने मुल्क में अमनो-सलामती, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए दुआ कराई।
उन्होंने कहा कि सूफी संतों की शिक्षाएं इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे और सेवा का संदेश देती हैं। उन्होंने अकीदतमंदों से इन शिक्षाओं को अपनी जिंदगी में अपनाने और समाज में आपसी सौहार्द कायम रखने का आह्वान किया।
अंजुमन गुलामाने मुस्तफा सोसायटी, कलियर इकाई के सदर हाजी गुलशाद सिद्दीकी ने कहा कि जश्न-ए-गौसुल आजम का आयोजन अकीदत के साथ-साथ समाज में मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सूफी परंपरा से लोगों के जुड़ाव को दर्शाती है। उन्होंने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी अकीदतमंदों का आभार भी जताया।
खादिम मुनव्वर अली साबरी ने कहा कि बुजुर्गाने दीन की जिंदगी इंसानियत और खिदमत का बेहतरीन उदाहरण रही है। उन्होंने कहा कि जश्न-ए-गौसुल आजम जैसे कार्यक्रमों का मकसद सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों को मोहब्बत, सेवा और भाईचारे का संदेश देना भी है। उन्होंने आयोजन में पहुंचे सभी अकीदतमंदों का स्वागत किया।
सूफी राशिद अली साबरी ने कहा कि सूफियाना परंपरा हमेशा से मोहब्बत और इंसानियत की बात करती आई है। उन्होंने कहा कि हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह की जिंदगी लोगों को नेक रास्ते पर चलने और जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने देश में अमन और भाईचारे के लिए दुआ की।
अंजुमन गुलामाने मुस्तफा सोसायटी के सेक्रेट्री राहिल कुरैशी ने कहा कि सोसायटी की ओर से पैगम्बर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं और सूफी परंपरा के संदेश को आम करने के लिए लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में दूर-दराज से पहुंचे अकीदतमंदों ने शिरकत की और आयोजन को सफल बनाने में सभी ने सहयोग किया।
चादरपोशी के बाद फातिहा ख्वानी हुई। इसके बाद नातख्वानों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। नातों की रूहानी महफिल के दौरान अकीदतमंद अकीदत में झूमते नजर आए और पूरा माहौल सूफियाना रंग में रंग गया।
कार्यक्रम के अंत में शाह गाजी मियां ने मुल्क में अमनो-सलामती और कार्यक्रम में पहुंचे तमाम अकीदतमंदों के लिए विशेष दुआ कराई। कार्यक्रम के समापन के बाद नमाज-ए-जुहर के पश्चात सज्जादानशीन की कोठी पर लंगर-ए-आम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
गौरतलब है कि जश्न-ए-गौसुल आजम, हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह की याद में मनाया जाता है। सूफी परंपरा में उन्हें ‘गौस-ए-आजम’ के नाम से जाना जाता है। इस मौके पर कुरआन ख्वानी, फातिहा, नातख्वानी, चादरपोशी, लंगर और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
अंजुमन गुलामाने मुस्तफा सोसायटी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सोसायटी के सेक्रेट्री राहिल कुरैशी, कलियर इकाई के सदर हाजी गुलशाद सिद्दीकी समेत अंजुमन से जुड़े अकीदतमंदों ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस मौके पर आलम सैफी, कल्लू भाई, परवेज आलम, फैसल खान उर्फ मोंटू, आदिल कुरैशी, सावेज खान, शाहबाज उर्फ गुल्लू, शम्स अली साबरी, रिहान कुरैशी, वाजिद अंसारी, रियाज कुरैशी, रईस अंसारी, हाजी गुलजार, शफीक साबरी, शालू कुरैशी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।



