4 महीने, 1500 किलोमीटर और खाकी का अटूट हौसला — मुम्बई की भीड़ से मासूम को सकुशल ढूंढ लाई कलियर पुलिस..

पंच👊नामा
पिरान कलियर: चप्पल खोने के डर से उर्स मेले में पिता का हाथ छूटा… और 9 साल का मासूम सैकड़ों मील दूर मायानगरी मुम्बई जा पहुँचा।
समय बीतता गया, परिजनों की उम्मीदें टूटने लगीं, लेकिन हरिद्वार पुलिस की जिद और जज़्बे ने हार नहीं मानी। नतीजा—चार महीने बाद 1500 किलोमीटर दूर से मेरठ के लाल फैजान को सकुशल परिजनों से मिलाकर खाकी ने अपना मानवीय चेहरा फिर साबित कर दिया।
एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल के सख्त निर्देशों पर चला सर्च ऑपरेशन…..
मामला नाबालिग से जुड़ा होने के चलते वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार प्रमेन्द्र डोबाल ने इसे अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देशन में जिलेभर के पुलिस तंत्र को सक्रिय किया गया और आधुनिक तकनीक व खुफिया सूचनाओं के सहारे बच्चे की तलाश लगातार जारी रखी गई।
थानाध्यक्ष रविन्द्र कुमार के नेतृत्व में ‘ऑपरेशन मिलाप’ को मिली कामयाबी…..
थानाध्यक्ष रविन्द्र कुमार के नेतृत्व में कलियर पुलिस ने मुखबिर तंत्र, सीसीटीवी फुटेज, फोटो पम्पलेट, DCRB, SCRB, दूरदर्शन, अनाथालय, शेल्टर होम, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे हर संभव माध्यमों का सहारा लिया।
महीनों की मशक्कत के बाद पुलिस टीम मुम्बई पहुँची, जहाँ बी.जे. होम फॉर चिल्ड्रन, माटुंगा में बालक की शिनाख्त कर उसे संरक्षण में लिया गया।
मासूम की आपबीती: डर ने बदली दिशा, पर किस्मत ने मिलाया रास्ता….
पूछताछ में बालक ने बताया कि दरगाह के बाहर चप्पल खो जाने और पिता की डांट के डर से वह रेलवे स्टेशन पहुँचा और ट्रेन में बैठकर मुम्बई चला गया। बालक के साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई, यह राहत की बड़ी खबर रही।
मिलन का पल: आँसू बने खुशी की गवाही……
बेटे के मिलने की खबर मिलते ही पिता थाना पिरान कलियर पहुँचे। चार महीने बाद फैजान को सीने से लगाते ही उनकी आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े। परिजनों ने कलियर पुलिस के इस नेक और मानवीय कार्य के लिए दिल से धन्यवाद किया।
पुलिस टीम….
रविन्द्र कुमार — थानाध्यक्ष
अ0उ0वि0 सूरज सिंह नेगी
हेडकांस्टेबल कुम्पाल तोमर
कांस्टेबल जितेन्द्र रावत
कांस्टेबल भादूराम



