
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: कनखल क्षेत्र के नूरपुर पंजनहेड़ी गांव में सरकारी भूमि की पैमाइश के दौरान हुआ खूनी संघर्ष सिर्फ आपसी विवाद नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर चल रही सियासी गुटबाजी, सत्ता संरक्षण और जिला प्रशासन की लचर कार्यशैली का नतीजा बनकर सामने आया है। करोड़ों की बेशकीमती जमीन को लेकर लंबे समय से सुलग रहा विवाद बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट में बदल गया, जिससे पूरा इलाका दहशत में आ गया।
इस घटनाक्रम ने भाजपा के दो प्रभावशाली गुटों की सियासी खाई को सार्वजनिक कर दिया है। एक ओर जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान का खेमा है, तो दूसरी ओर क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले भाजपा से जुड़े अतुल चौहान और उनके भतीजे तरुण चौहान का गुट आमने-सामने है।
बताया जाता है कि प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार से राजनीति में कदम रखने वाले अमित चौहान को भाजपा में सक्रिय होने के बाद तेज राजनीतिक उभार मिला। स्वामी यतीश्वरानंद से नजदीकी के चलते उनकी पार्टी में एंट्री हुई।
चूंकि स्वामी यतीश्वरानंद इस विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं, लिहाजा उनका संरक्षण अमित चौहान के लिए सियासी सीढ़ी साबित हुआ। जिला पंचायत सदस्य बनने के बाद अपेक्षाकृत गुमनाम रहे अमित चौहान को सीधे जिला पंचायत उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
दूसरी ओर, भाजपा से जुड़े अतुल चौहान और उनके भतीजे तरुण चौहान की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी किसी से छिपी नहीं है। अतुल चौहान लंबे समय से विधानसभा टिकट की दावेदारी कर रहे थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने से वह असहज हो गए। इसके बाद उन्होंने भाजपा के भीतर दूसरे प्रभावशाली गुट, पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के खेमे का रुख कर लिया।
राजनीतिक समीकरणों की इस खींचतान के बीच सरकारी भूमि पर कब्जों को लेकर शिकायती प्रार्थना पत्रों का सिलसिला शुरू हुआ। हरिद्वार-लक्सर पट्टी में जमीनों के आसमान छूते दामों के चलते यह विवाद और भी तीखा होता चला गया। शिकायतों के बाद प्रशासन ने सरकारी भूमि की पैमाइश का निर्णय लिया, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई न होने से हालात लगातार बिगड़ते चले गए।
बुधवार को पैमाइश के दौरान दोनों गुट आमने-सामने आ गए। कहासुनी और तनातनी देखते ही देखते हिंसक संघर्ष में बदल गई। इसी दौरान गोलियां चल गईं। फायरिंग में जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान के भाई और प्रॉपर्टी डीलर सचिन चौहान के पेट में गोली लग गई। गंभीर हालत में उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया।
फायरिंग का आरोप अतुल चौहान, उनके भतीजे तरुण चौहान और समर्थकों पर लगा है। वहीं अतुल चौहान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल कर गोली चलाने को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है।
करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी और निजी भूमि को लेकर चल रहे इस विवाद ने भाजपा के दोनों सियासी गुटों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। साथ ही यह सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि यदि जिला प्रशासन समय रहते सख्ती दिखाता तो क्या यह खूनी संघर्ष टल सकता था। फिलहाल पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल बना हुआ है।



