“कुछ देर में गंगनहर में छोड़ा जाएगा जल, प्रवाह के साथ बहकर जाएगी घाट निर्माण के दौरान छोड़ी गई हजारों टन मिट्टी..
उत्तर प्रदेश ने ठुकराया 20 नवंबर तक क्लोजर बढ़ाने का अनुरोध तो मेला अधिष्ठान बोला, पूरी हो चुकी घाट निर्माण की सारी चुनौतियां..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; अर्धकुंभ की तैयारियों के बीच गंगनहर में कुछ ही देर में जलप्रवाह शुरू होने जा रहा है। इसके साथ ही घाट निर्माण के दौरान नहर की तलहटी और किनारों पर छोड़ी गई हजारों टन मिट्टी भी पानी के साथ बहकर जाने की आशंका है। हैरानी की बात यह है कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों की ओर से कई बार मिट्टी हटाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद इसे नहीं हटाया गया। अब जब नहर में पानी छोड़ने का समय आ गया है तो इस लापरवाही का खामियाजा गंगनहर को भुगतना पड़ सकता है। उधर, उत्तर प्रदेश ने गंगनहर की क्लोजर अवधि 20 नवंबर तक बढ़ाने के उत्तराखंड के अनुरोध को ठुकरा दिया है। ऐसे में निर्माण कार्यों के लिए अतिरिक्त समय मिलने की उम्मीद भी खत्म हो गई है।
दरअसल, अर्धकुंभ के मद्देनजर हरिद्वार में गंगनहर किनारे करीब सवा तीन किलोमीटर के दायरे में 10 नए घाटों का निर्माण कराया जा रहा है। इन घाटों के निर्माण के लिए क्लोजर अवधि को महत्वपूर्ण माना जा रहा था। उत्तराखंड की ओर से निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए गंगनहर की बंदी 19-20 नवंबर तक बढ़ाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। सात नवंबर को क्लोजर अवधि समाप्त होने के साथ ही नहर में जलप्रवाह शुरू करने की तैयारी है। ऐसे में घाटों के निर्माण और मरम्मत से जुड़े शेष कार्यों को लेकर मेला अधिष्ठान के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर पहलू घाट निर्माण के दौरान निकली मिट्टी को लेकर है। उत्तराखंड सिंचाई विभाग के पुनर्वास खंड की ओर से घाटों की सुरक्षा के लिए मिट्टी की अस्थायी दीवारें बनाई गई थीं। इसके अलावा खुदाई से निकली हजारों टन मिट्टी रेलिंग के आसपास और गंगनहर की तलहटी में ही जमा कर दी गई। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मिट्टी को हटाने के लिए कई बार निर्देश दिए गए, लेकिन निर्देशों के बावजूद मिट्टी नहीं हटाई गई। अब जलप्रवाह शुरू होने पर यह मिट्टी पानी के साथ बहकर नहर में पहुंचेगी। इससे नहर की तलहटी में गाद जमा होने और जलप्रवाह प्रभावित होने की आशंका है।
सवाल यह है कि जब क्लोजर अवधि में ही मिट्टी हटाने के निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो अब पानी छोड़े जाने के बाद इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अर्धकुंभ जैसे बड़े आयोजन की तैयारियों के बीच निर्माण कार्यों के दौरान नहर की सुरक्षा और सफाई को लेकर बरती गई इस लापरवाही पर जवाबदेही तय होनी जरूरी है।
उधर, मेला अधिष्ठान का दावा है कि गंगनहर क्लोजर अवधि में अर्धकुंभ की तैयारियों के तहत हरिद्वार में घाटों के निर्माण और मरम्मत से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। करीब सवा तीन किलोमीटर क्षेत्र में बन रहे 10 नए घाटों का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है। शेष कार्यों को भी 30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, मेला अधिष्ठान के इन दावों के बीच नहर की तलहटी में छोड़ी गई हजारों टन मिट्टी और क्लोजर अवधि बढ़ाने की मांग खारिज होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। निर्माण की चुनौतियां पूरी होने का दावा अपनी जगह है, लेकिन गंगनहर में पानी के साथ बहने वाली मिट्टी की जवाबदेही कौन तय करेगा?



