“उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री खंडूरी ने दुनिया को कहा अलविदा” 91 साल की उम्र में ली अंतिम सांस..
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री धामी ने जताया दुख, राज्य सरकार ने घोषित किया तीन दिन का राजकीय शोक..

पंच👊नामा-ब्यूरो
उत्तराखंड की राजनीति के एक युग का मंगलवार को अंत हो गया। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। देहरादून के एक निजी अस्पताल में उन्होंने लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री , उत्तराखंड के मुख्यमंत्री समेत कई दिग्गज नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें ईमानदार, अनुशासित और जनहितैषी नेता बताया। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।
‘जनरल साहब’ के नाम से लोकप्रिय भुवन चंद्र खंडूरी का व्यक्तित्व राजनीति और सैन्य अनुशासन का अद्भुत संगम माना जाता था। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद तक अपनी सेवाएं दीं। सेना में उनकी कार्यशैली अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और सख्त प्रशासनिक छवि के लिए जानी जाती थी, जिसे उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में भी कायम रखा।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद खंडूरी प्रदेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। पहली बार वर्ष 2007 से 2009 तक और दूसरी बार 2011 से 2012 तक उन्होंने प्रदेश की कमान संभाली। अपने कार्यकाल में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया और सुशासन को प्राथमिकता दी।
उनकी सरकार के कई फैसले आज भी उत्तराखंड की राजनीति में मील का पत्थर माने जाते हैं। महिलाओं को पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय हो या फिर राज्य में पहली बार जेंडर बजटिंग लागू करना, खंडूरी ने विकास के साथ सामाजिक संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया। यही वजह रही कि उन्हें साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं में गिना जाता था।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्व प्रधानमंत्री की सरकार में उन्होंने केंद्रीय भूतल परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्य किया। इस दौरान देश की महत्वाकांक्षी स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना को आगे बढ़ाने में उनका अहम योगदान माना जाता है। गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे खंडूरी जनता के बीच अपनी सादगी और ईमानदार छवि के कारण बेहद लोकप्रिय थे। राजनीतिक विरोधी भी उनकी कार्यशैली और साफ छवि का सम्मान करते थे।
उनके निधन से उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हुआ है, जिसकी भरपाई आसान नहीं मानी जा रही। प्रदेशभर में भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि “जनरल साहब” हमेशा एक ईमानदार जननेता और अनुशासित प्रशासक के रूप में याद किए जाएंगे।



