“अर्द्धकुंभ के निर्माण कार्यों पर सैकड़ों करोड़ खर्च, अखाड़ों को चवन्नी भी नहीं, संतों में सुगबुगाहट..
अखाड़ों में निर्माण व अन्य व्यवस्थाओं के लिए अनुदान देती है सरकार, कई अखाड़े नासिक जाने का कर रहे विचार..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। धर्मनगरी में अर्द्धकुंभ की तैयारियों के नाम पर निर्माण कार्यों पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कहीं चौक-चौराहों का नए सिरे से निर्माण हो रहा है तो कहीं डिवाइडर तोड़कर दोबारा बनाए जा रहे हैं। निर्माण कार्यों को अंतिम रूप देने के लिए सरकारी मशीनरी पूरी ताकत झोंक रही है,
लेकिन कुंभ-अर्द्धकुंभ की असली पहचान माने जाने वाले अखाड़ों की तैयारियां अब तक गति नहीं पकड़ सकी हैं। वजह है अखाड़ों को मिलने वाले सरकारी अनुदान का इंतजार। संतों के बीच इस बात को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि जब व्यवस्थाओं के लिए आर्थिक सहायता ही नहीं मिलेगी तो अर्द्धकुंभ की तैयारियां कैसे परवान चढ़ेंगी।
कुंभ और अर्द्धकुंभ केवल सड़कों, चौराहों, घाटों और चमकते निर्माण कार्यों का आयोजन नहीं है। इसकी आत्मा अखाड़ों, संतों, महामंडलेश्वरों और देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं से जुड़ी है। अखाड़ों में साधु-संतों के ठहरने, धार्मिक गतिविधियों, भंडारों और अन्य व्यवस्थाओं के लिए व्यापक तैयारियां करनी पड़ती हैं। इन व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च को देखते हुए सरकार पूर्व में कुंभ-अर्द्धकुंभ के दौरान अखाड़ों को निर्माण और अन्य जरूरी कार्यों के लिए अनुदान देती रही है। मगर इस बार अब तक अनुदान नहीं मिलने से संतों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
निर्माण कार्यों पर खर्च, अखाड़ों में इंतजार…..
एक तरफ सरकारी विभाग निर्माण कार्यों को पूरा करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ अखाड़ों में अनुदान को लेकर कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आने से तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। अर्द्धकुंभ नजदीक आने के साथ ही अखाड़ों को व्यवस्थाएं जुटाने के लिए संसाधनों की जरूरत बढ़ेगी। ऐसे में अनुदान मिलने में देरी का असर तैयारियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। संतों के बीच चर्चा है कि जब तक आर्थिक सहायता और व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक तैयारियों को अपेक्षित गति देना मुश्किल होगा।
नासिक कुंभ में जाने की चर्चा…..
संतों के बीच अब यह चर्चा भी दबी जुबान में होने लगी है कि यदि अनुदान और जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो कुछ अखाड़े नासिक कुंभ में शामिल होने का विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर किसी अखाड़े की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन ऐसी चर्चाएं हरिद्वार के अर्द्धकुंभ की तैयारियों को लेकर चिंता जरूर बढ़ा रही हैं।
सवाल यह है कि जब अर्द्धकुंभ के निर्माण कार्यों पर सरकारी खजाने से बड़ी धनराशि खर्च की जा रही है, तो अखाड़ों की व्यवस्थाओं के लिए अनुदान का इंतजाम कब होगा? आखिर सड़कों और डिवाइडरों को नया रूप देने के साथ उस धार्मिक परंपरा की तैयारियों पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिसके कारण हरिद्वार का कुंभ विश्वभर में पहचान रखता है। समय रहते अनुदान और व्यवस्थाओं पर निर्णय नहीं हुआ तो निर्माण कार्यों की चमक के बीच अखाड़ों की तैयारियां पीछे छूटने का खतरा बना रहेगा।



