हरिद्वार

“चुनाव आयोग के आदेश, 7 जुलाई तक चलनी थी एसआईआर प्रक्रिया, बीएलओ ने तीन दिन पहले समेट लिया सामान..

बड़ी संख्या में पात्र लोग प्रक्रिया से रह गए वंचित, हड़बड़ी पर उठ रहे सवाल, आखिर किसके आदेश पर तीन दिन पहले पूरी की गई प्रक्रिया..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के बीच प्रदेशभर में शुक्रवार देर रात जारी हुए नए निर्देशों के बाद पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। आयोग के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एसआईआर अभियान सात जुलाई तक चलना था, लेकिन शनिवार रात को ही कई स्थानों पर बीएलओ ने शिविर समेट लिए। इससे बड़ी संख्या में ऐसे लोग आवेदन जमा नहीं कर सके, जिनके प्रपत्र पहले से तैयार थे।शनिवार दिनभर लोग हाथों में आवेदन पत्र और जरूरी दस्तावेज लेकर बीएलओ और निर्धारित केंद्रों की तलाश में भटकते रहे। कई लोगों ने पहले से दस्तावेज तैयार कर रखे थे और अंतिम दिनों में आवेदन जमा करने की योजना बनाई थी, लेकिन अचानक प्रक्रिया समाप्त होने की सूचना मिलने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। कई जगह लोगों को बताया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद आवेदन लेने का कार्य रोक दिया गया है। वहीं, कई बीएलओ का कहना है कि उन्हें शुक्रवार देर रात वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से नए निर्देश मिले, जिसके बाद शनिवार रात को ही अभियान समेटने के लिए कहा गया। ऐसे में चुनाव आयोग के पहले से तय सात जुलाई तक अभियान चलाने के कार्यक्रम के बावजूद उन्हें निर्धारित समय से पहले पूरी प्रक्रिया बंद करनी पड़ी।इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ज्वालापुर त्रिमूर्ति नगर के निर्दलीय पार्षद एवं अधिवक्ता अहसान अंसारी ने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी से शिकायत की है। उन्होंने मांग की है कि सात जुलाई तक निर्धारित कार्यक्रम के बावजूद तीन दिन पहले अभियान समाप्त किए जाने के आदेशों की जांच कराई जाए और जिन पात्र लोगों के आवेदन जमा नहीं हो सके, उन्हें दोबारा अवसर दिया जाए।अहसान अंसारी एडवोकेट ने कहा, “जब चुनाव आयोग ने सात जुलाई तक विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाने का कार्यक्रम तय किया था, तो बिना किसी सार्वजनिक सूचना के तीन दिन पहले इसे समाप्त करना पूरी तरह अनुचित है। इससे हजारों पात्र मतदाता प्रभावित हुए हैं। बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी को शिकायत देकर पूरे मामले की जांच कराने और वंचित लोगों को दोबारा आवेदन का अवसर देने की मांग की है। यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मामले को राज्य निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष भी उठाया जाएगा।“अचानक बदले गए निर्देशों को लेकर आमजन में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब सात जुलाई तक आवेदन लिए जाने की जानकारी दी गई थी तो बीच में समय-सीमा बदलने की स्पष्ट सूचना क्यों नहीं दी गई। इससे सबसे अधिक नुकसान उन लोगों को हुआ, जिन्होंने अंतिम दिनों में दस्तावेज तैयार किए थे।पूरे घटनाक्रम ने अभियान की पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर चुनाव आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के बावजूद किस अधिकारी के आदेश पर तीन दिन पहले ही अभियान समेट दिया गया। यदि समय-सीमा में बदलाव किया गया था तो इसकी व्यापक जानकारी आम लोगों तक क्यों नहीं पहुंचाई गई।फिलहाल निर्वाचन विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और निर्वाचन विभाग की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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