हरिद्वार

“रमज़ान के अलविदा जुमे पर ‘इस्लाह-ए-मुआशरा’ की अपील, दहेज और शादी की फिजूल रस्मों के खिलाफ आवाज़ उठाने का आह्वान..

उलेमा ने मस्जिदों में बयान देकर समाज को जागरूक करने और सादगी से निकाह कराने की मुहिम चलाने की अपील की..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: रमज़ान मुबारक के आख़िरी जुमे को इस्लाह-ए-मुआशरा (समाज सुधार) के नाम मनाने की अपील की गई है।जमीयत उलेमा ए हिन्द (उत्तराखंड) से जुड़े उलेमाओं ने कहा कि आज मुस्लिम समाज और मुआशरा में कई तरह की खराबियाँ जन्म ले चुकी हैं। इनमें शादी-ब्याह में तरह-तरह की रस्में और उन पर बेहताशा खर्च एक बड़ी बुराई बन चुकी है।उलेमा ने कहा कि लोग अपनी जमीन-जायदाद बेचकर, गिरवी रखकर और यहाँ तक कि सूद-ब्याज पर पैसे लेकर इन रस्मों को निभा रहे हैं। जहेज़ जैसी लानत ने पूरे मुआशरे को अपनी चपेट में ले लिया है। एक बड़ा तबका खुले तौर पर जहेज़ का मुतालबा कर रहा है। शादी का मयार दींदारी और तालीम के बजाय जहेज़ की कसरत बन गया है। इसका नतीजा यह है कि बहुत-सी बेटियाँ निकाह के बिना अपने माँ-बाप के घर बैठी हैं।उलेमा ने कहा कि तमाम उलमा-ए-कराम, इमाम-ए-आज़म और दावत का काम करने वालों की जिम्मेदारी है कि वे समाज को इन खुदतराशीदा रस्मों और जहेज़ की आग से बचाने के लिए अपने-अपने हलकों में कमर कस लें और पूरी हिम्मत के साथ इस लानत के खिलाफ नबवी तरीके पर अपनी तहरीरों और तकरीरों के जरिए आवाज़ उठाएं।सुझाए गए कदम….
उलेमा ने समाज में सुधार के लिए कुछ अहम तजावीज भी पेश की हैं।
रमज़ान मुबारक के बाद शादी का सीजन शुरू होने वाला है, इसलिए रमज़ान के आख़िरी जुमे को जहेज़ की लानत से निजात के तौर पर मनाया जाए। सभी मसाजिद में जहेज़ और शादी की गैर-ज़रूरी रस्मों के खिलाफ शरीअत की रोशनी में बयान किए जाएं और लोगों से इन रस्मों को छोड़ने का अहद लिया जाए। ईद की नमाज़ में भी इस सिलसिले में बयान किए जाएं। रमज़ान के बाद अपनी-अपनी बस्ती में इस्लाह-ए-मुआशरा के उनवान से नौजवानों को जमा कर शादी की गलत रस्मों और जहेज़ के खिलाफ समझाया जाए और सादगी के साथ शादी कराने की मुहिम चलाई जाए।जिस घर में लड़के या लड़की की शादी होने वाली हो, उनसे वक्त लेकर मुलाकात की जाए और उन्हें सादगी के साथ निकाह करने के लिए तैयार किया जाए। बाराात में कम से कम लोग ले जाने, गाने-बजाने और आतिशबाजी से परहेज करने, सुन्नत तरीके से खाना खिलाने और गैर-शरई लिबास से बचने की सलाह दी जाए। मुसलमानों को विरासत की अहमियत और फरज़ियत बताकर सही तरीके से विरासत देने के लिए तैयार किया जाए। ईद मुबारक के मौके पर फिजूलखर्ची, गैर-जरूरी डेकोरेशन और गैर-शरई सैर-ओ-तफरीह से भी बचने की नसीहत की जाए। अरबाब-ए-मदारिस से भी अपील की गई है कि वे अपने यहाँ पढ़ने वाले तलबा के अंदर शादी की गलत रस्मों और जहेज़ की लानत से बचने की जहनसाजी करें।अपील करने वाले….
इस अपील में मुफ्ती रईस अहमद, मौलाना शराफत अली कासमी, मौलाना अब्दुल वहीद, मौलाना मोहम्मद अहमद, मुफ्ती मोहम्मद तौफीक, मौलाना अब्दुल मन्नान (सदर, जमीयत उलमा हरिद्वार), मौलाना मोहम्मद मुकीम (सदर, जमीयत उलमा नैनीताल) और मुफ्ती मोहम्मद तअज़ीम (रुक्न, जमीयत उलमा उत्तराखंड) सहित अन्य उलेमा ने लोगों से ज्यादा से ज्यादा इस पैगाम को शेयर करने की अपील की है।

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