“हरिद्वार में अजग-गजब खेल: सड़क बनी नहीं, ठेकेदार को पहले ही कर दिया पूरा भुगतान पूरा, सीएम दरबार हुई शिकायत तो आया जवाब “बजट नहीं है.!
जल जीवन मिशन के तहत डाली गई थी पेयजल लाइन, अफसर की कार्यशैली पर सवाल, पांच हजार से ज़्यादा की आबादी बेहाल..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। ज्वालापुर के सराय क्षेत्र स्थित गायत्री विहार कॉलोनी में जल जीवन मिशन के तहत पेयजल लाइन बिछाने के बाद सड़क की मरम्मत नहीं कराए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पेयजल निगम की ओर से कराए गए कार्य में सड़क को खोदकर पेयजल लाइन तो बिछा दी गई, लेकिन सड़क को दुरुस्त किए बगैर ही छोड़ दिया गया। आरोप है कि काम पूरा किए बिना ही संबंधित ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया। अब मामला मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंचा तो विभाग की ओर से बजट नहीं होने की बात कही जा रही है। लेकिन विभाग के इस जवाब से कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है।
गायत्री विहार कॉलोनी की इस सड़क से पांच हजार से अधिक की आबादी का आवागमन होता है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी हुई सतह लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। बरसात में गड्ढों में पानी भरने और कीचड़ व फिसलन के कारण दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत पेयजल लाइन डालने के लिए सड़क को खोदा गया था। नियमानुसार लाइन डालने के बाद सड़क को पूर्व की स्थिति में बहाल किया जाना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि ठेकेदार सड़क की मरम्मत किए बिना ही काम छोड़कर चला गया। इसके बावजूद भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।
मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंची शिकायत…
सड़क की बदहाली से परेशान समाजसेवी अतहर अंसारी ने मामले को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दरबार में शिकायत की और सड़क की मरम्मत कराने के साथ ही पूरे प्रकरण की जांच की मांग की। शिकायत के जवाब में सड़क की मरम्मत के लिए बजट उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई।
अतहर अंसारी ने कहा, “मुख्यमंत्री दरबार में शिकायत करने का मकसद किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि जनता की समस्या का समाधान कराना है। लेकिन जिस काम के लिए सरकार ने बजट जारी किया और ठेकेदार को भुगतान भी कर दिया गया, उसी सड़क की मरम्मत के लिए अब बजट नहीं होने की बात समझ से परे है। अगर ठेकेदार ने अपना काम पूरा नहीं किया था तो उसका भुगतान क्यों किया गया?
”उन्होंने कहा, “सरकार को यह जांचना चाहिए कि काम पूरा किए बिना भुगतान किस अधिकारी की संस्तुति पर हुआ। अगर ठेकेदार ने नियम और शर्तों के मुताबिक काम नहीं किया है तो उसे ब्लैक लिस्ट किया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई हो और सरकारी धन का गलत भुगतान हुआ है तो उसकी रिकवरी कराई जाए। जनता दोबारा उसी काम के लिए बजट का इंतजार क्यों करे?
”अतहर अंसारी ने यह भी कहा कि यदि जांच के दौरान विभागीय स्तर पर किसी अधिकारी की लापरवाही, मिलीभगत या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। “मामला सिर्फ एक सड़क का नहीं है। सवाल सरकारी धन और उसकी निगरानी का है। पांच हजार से ज्यादा लोग सड़क की बदहाली झेल रहे हैं, बरसात में दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल है। ऐसे में सिर्फ बजट नहीं होने का जवाब समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
भुगतान की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल…..
मामले में अब यह जांच का विषय है कि ठेकेदार को भुगतान से पहले मौके पर कार्य की जांच किस स्तर पर की गई। क्या सड़क की मरम्मत कार्य का हिस्सा थी? यदि थी तो उसे पूरा किए बिना कार्य पूर्ण कैसे प्रमाणित किया गया? क्या भुगतान से पहले संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था?
स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की जांच केवल सड़क बनवाने तक सीमित न रहे,
बल्कि ठेकेदार को किए गए भुगतान, कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। यदि अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई और सरकारी धन की रिकवरी कराई जाए। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दरबार तक पहुंच चुके इस मामले में विभाग केवल “बजट नहीं है” कहकर जिम्मेदारी से बचता है या फिर यह भी पता लगाया जाता है कि सड़क बने बगैर भुगतान आखिर किस आधार पर किया गया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।



