उत्तराखंड

“टिहरी विकास प्राधिकरण में नक्शों की मंजूरी पर उठे गंभीर सवाल, अधिकारी पर करोड़ों के वित्तीय नुकसान के आरोप..

₹72 लाख की बैंक गारंटी के बिना नक्शा रिलीज करने से लेकर करोड़ों के शुल्क न वसूलने तक के आरोप; विभागीय अभियंता ने उच्चाधिकारियों से की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
टिहरी; उत्तराखंड के टिहरी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण में भवन मानचित्रों की स्वीकृति और अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। प्राधिकरण में प्रतिनियुक्ति पर तैनात सहायक अभियंता दिग्विजय नाथ तिवारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता सहायक अभियंता पंकज पाठक ने उच्चाधिकारियों को भेजी शिकायत में पद के दुरुपयोग, नियमों की अनदेखी कर मानचित्र स्वीकृत करने, प्राधिकरण को वित्तीय नुकसान पहुंचाने और कुछ मामलों में अवैध निर्माणों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई न किए जाने के आरोप लगाए हैं।शिकायत में अलग-अलग फाइलों का उल्लेख करते हुए कई मामलों में राजस्व और प्राधिकरण शुल्क से जुड़े गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।पार्क और खुले स्थल की भूमि को लेकर सवाल….
शिकायत में फाइल संख्या TSN/CR/0002/24-25 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि जिस प्रकरण को पहले कृषि भूमि के आधार पर अस्वीकृत किया गया था, बाद में उसे मास्टर प्लान से बाहर दर्शाते हुए स्वीकृति प्रदान कर दी गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित भूमि वास्तव में पार्क एवं खुले स्थल के रूप में दर्ज थी। ऐसे में मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की जांच की मांग की गई है।₹1.46 करोड़ के शुल्क की वसूली पर भी उठे सवाल….
मनोज कुमार गुप्ता से संबंधित फाइल संख्या TSN/NC/0004/24-25/RE1 को लेकर शिकायत में कहा गया है कि चंबा के मास्टर प्लान से जुड़े तथ्यों को ध्यान में नहीं रखा गया। आरोप है कि 2000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंड पर देय करीब ₹1.46 करोड़ के भू-उच्चीकरण शुल्क की वसूली नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने इसे प्राधिकरण को संभावित वित्तीय नुकसान का मामला बताते हुए रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।₹72 लाख की बैंक गारंटी के बिना नक्शा रिलीज करने का आरोप….
कमल कांत मलिक से संबंधित फाइल संख्या TSN/L/0001/24-25 में शिकायतकर्ता ने ले-आउट नियमावली के प्रावधानों को लेकर सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार, संबंधित मामले में करीब ₹72 लाख की बैंक गारंटी लिया जाना आवश्यक था, लेकिन बैंक गारंटी जमा कराए जाने से पहले ही नक्शा रिलीज कर दिया गया। इस मामले में भी दस्तावेजों और स्वीकृति प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।₹2.18 करोड़ के शुल्क से जुड़ा एक और मामला….
पीयूष अग्रवाल से संबंधित फाइल संख्या TSN/NC/0014/23-24, ग्राम कौड़ियाला को लेकर भी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, 2000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि से संबंधित इस प्रकरण में नियमों के तहत देय करीब ₹2.18 करोड़ के शुल्क की वसूली नहीं की गई और मानचित्र को स्वीकृति प्रदान कर दी गई। शिकायत में इस मामले की भी वित्तीय एवं तकनीकी जांच की मांग की गई है।मुनि की रेती में होटल के मानचित्र पर भी सवाल….
शिकायत में मुनि की रेती क्षेत्र में प्रस्तावित 5/7 स्टार होटल के मानचित्र को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। आरोप है कि संबंधित स्थल का भू-उपयोग गलत तरीके से दर्शाकर मानचित्र स्वीकृत किया गया, जबकि मुख्य नगर नियोजक (CTP) के रिकॉर्ड में उक्त स्थान को पार्क एवं खुले स्थल के रूप में दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने संबंधित मास्टर प्लान, भू-उपयोग और स्वीकृति अभिलेखों का मिलान कराने की मांग की है।सील इमारतों में निर्माण जारी रहने का भी आरोप…..
शिकायत में नरेंद्रनगर तहसील क्षेत्र में कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई मामलों में सीलिंग की कार्रवाई नहीं की गई, जबकि पूर्व में सील की गई कुछ इमारतों में भी निर्माण कार्य जारी रहने की शिकायत है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्राधिकरण की प्रवर्तन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।बैठक में विरोध के बाद विवाद बढ़ने का दावा…..
शिकायतकर्ता अभियंता ने यह भी आरोप लगाया है कि विभागीय बैठक में उन्होंने संबंधित मामलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। शिकायत में बैठक के दौरान कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दिए जाने व बाद में उनके खिलाफ शिकायतें कर उन्हें मानसिक रूप से परेशान और हतोत्साहित करने का प्रयास किए जाने का दावा किया गया है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।मंत्री की बैठक के बाद कार्रवाई को लेकर उठे सवाल….
शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित मामलों को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा और मंत्री सुबोध उनियाल की बैठक के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि विभागीय स्तर पर आपत्तियां सामने आने के बाद भी संबंधित प्रकरणों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी।फिलहाल शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, संबंधित फाइलों की तकनीकी व वित्तीय ऑडिट और आरोपों की पुष्टि होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। शिकायत सचिव, आवास विभाग, उत्तराखंड शासन और जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल को भेजी गई है। अब मामले में शासन और जिला प्रशासन की ओर से जांच होती है या नहीं और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखने वाली बात होगी।

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