“मेंहदी डोरी की रस्म के साथ चढ़ा उर्स का रंग, देर रात अदा हुई साबिर पाक के उर्स की पहली रस्म..
कदीमी घर से दरगाह तक निकला जुलूस, दरगाह पर उमड़ा जायरीनों का हुजूम, सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम..

पंच👊नामा
पिरान कलियर; माह-ए-रबीउल अव्वल का चांद नजर आते ही साबिर पाक रहमतुल्लाह अलैह के 758वें सालाना उर्स व मेले का विधिवत आगाज हो गया। शुक्रवार की देर रात अकीदतमंदों की मौजूदगी में उर्स की पहली रस्म मेंहदी डोरी अदा की गई। इस मौके पर दरगाह शरीफ और आसपास के इलाकों में जायरीनों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा कलियर अकीदत व रूहानी माहौल में नजर आया।
रबीउल अव्वल का चांद नजर आने के बाद मेंहदी डोरी की रस्म की शुरुआत हुई। बड़ी तादाद में अकीदतमंद दरगाह शरीफ से हल्का करते हुए सज्जादानशीन के कदीमी घर पहुंचे। यहां से संदल व मेंहदी डोरी से सजे थालों को सज्जादा परिवार व अकीदतमंद अपने सिरों पर रखकर जुलूस की शक्ल में दरगाह शरीफ की ओर रवाना हुए। जुलूस के दौरान अकीदतमंदों की ओर से नात-ओ-मनकबत और सलातो-सलाम पेश किए गए।
जुलूस के दरगाह शरीफ पहुंचने के बाद दरगाह साबिर पाक में पूरे अदबो-एहतराम के साथ मेंहदी डोरी की रस्म अदा की गई। रस्म पूरी होने के बाद मेंहदी डोरी को तबर्रुक के तौर पर जायरीनों में तकसीम किया गया। तबर्रुक हासिल करने के लिए बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह परिसर में मौजूद रहे।
मेंहदी डोरी की रस्म को लेकर दरगाह परिसर से लेकर मुख्य द्वार और आसपास के बाजारों तक अकीदतमंदों का हुजूम दिखाई दिया। देर रात तक दरगाह क्षेत्र में रौनक बनी रही। दूरदराज से पहुंचे जायरीनों ने साबिर पाक की दरगाह पर हाजिरी देकर अपनी मन्नतें मांगीं और मुल्क में अमनो-अमान की दुआ की।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। क्षेत्राधिकारी भगवानपुर सुमित पांडेय और मेला प्रभारी कमल मोहन भंडारी की निगरानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। दरगाह के मुख्य द्वार से लेकर दरगाह शरीफ परिसर और जुलूस के पूरे रास्ते पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। मुख्य गेट पर बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात रही, जबकि जुलूस के साथ भी पुलिसकर्मी लगातार मुस्तैद रहे, ताकि भीड़ के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो और जायरीनों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
साहिबजादा शाह यावर एजाज कुद्दुसी साबरी ने बताया कि माह-ए-रबीउल अव्वल का चांद नजर आने के साथ ही साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स की रस्मों का सिलसिला शुरू हो गया है। मेंहदी डोरी की रस्म उर्स की पहली अहम रस्म है, जिसे पूरी अकीदत और परंपरागत तरीके से अदा किया गया। उन्होंने कहा कि उर्स में देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले जायरीनों के लिए दरगाह की ओर से जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं और सभी से उर्स के दौरान आपसी भाईचारे, अमन और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है।
खादिम मुनव्वर अली साबरी ने बताया कि मेंहदी डोरी की रस्म अहम रस्म है इसके बाद उर्स का विधिवत आगाज हो जाता है। उन्होंने बताया रबीउल अव्वल का चांद नजर आने के बाद अकीदतमंदों ने कदीमी घर से मेंहदी डोरी संदल के थाल जुलूस की शक्ल में दरगाह शरीफ लेकर पहुंचे, जहां रस्म अदा की गई। बाद में मेंहदी डोरी को तबर्रुक के रूप में जायरीनों में तकसीम किया गया। उन्होंने कहा कि उर्स में आने वाले हर जायरीन की खिदमत और सुविधा का ख्याल रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उर्स की पहली रस्म के साथ ही कलियर में अगले कई दिनों तक चलने वाले सालाना उर्स व मेले की रौनक बढ़ गई है। दरगाह क्षेत्र में जायरीनों की आमद लगातार बढ़ने की उम्मीद है। प्रशासन और पुलिस की ओर से भी उर्स के दौरान सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण को लेकर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।



