“इंटरनेट के असीमित इस्तेमाल से बच्चों पर बढ़ रहा दबाव, अब संभलने की जरूरत: ललित मिगलानी..
अभिभावकों, स्कूलों और प्रशासन से डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की अपील..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; इंटरनेट और डिजिटल तकनीक जहां बच्चों के लिए शिक्षा, जानकारी और संवाद का अहम माध्यम बन चुके हैं, वहीं इनके अनियंत्रित और असीमित इस्तेमाल को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और लगातार स्क्रीन पर समय बिताने की आदत बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी पढ़ाई, नींद, एकाग्रता और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। इसको लेकर उच्च न्यायालय नैनीताल के अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता ललित मिगलानी ने अभिभावकों, विद्यालयों और प्रशासन से समय रहते ठोस कदम उठाने की अपील की है।
अधिवक्ता ललित मिगलानी ने कहा कि आज इंटरनेट को पूरी तरह रोकना किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि बच्चों को सुरक्षित, संतुलित और जिम्मेदार डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों से लेकर किशोरों तक में अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण पढ़ाई और नींद प्रभावित होने के साथ ही परिवार के साथ संवाद और सामाजिक व्यवहार पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बच्चों के सामने साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, अनुचित सामग्री, फर्जी पहचान और अन्य साइबर अपराधों का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में बच्चों को केवल इंटरनेट इस्तेमाल करने से रोकने के बजाय उन्हें इसके सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल की जानकारी देना ज्यादा जरूरी है।
मिगलानी ने अभिभावकों से बच्चों के स्क्रीन टाइम के लिए उम्र के अनुरूप सीमाएं तय करने, उनकी ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति जागरूक रहने और बच्चों से लगातार संवाद बनाए रखने की अपील की। उन्होंने विद्यालयों में Cyber Safety और Digital Literacy को जागरूकता कार्यक्रमों का हिस्सा बनाने व बच्चों को सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और अनजान लोगों से ऑनलाइन संपर्क के खतरों के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल में Parental Guidance और Parental Controls का उचित उपयोग किया जाना चाहिए। साइबर अपराध या ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में बच्चों को डरने व चुप रहने के बजाय तत्काल अभिभावकों, विद्यालय या संबंधित प्राधिकरण से सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने बच्चों के लिए खेलकूद, पुस्तक-पठन, रचनात्मक गतिविधियों और परिवार के साथ समय बिताने के अवसर बढ़ाने की भी अपील की। मिगलानी ने कहा कि “तकनीक बच्चों के विकास का माध्यम बने, उनके बचपन का विकल्प नहीं। ”उन्होंने कहा कि समाज, अभिभावक, विद्यालय और प्रशासन मिलकर समय रहते प्रयास करें तो इंटरनेट के दुरुपयोग से पैदा होने वाली कई समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि “अभी संभलने की जरूरत है, नहीं तो आने वाली पीढ़ी के लिए देर हो जाएगी।” बच्चों को इंटरनेट से दूर करना उद्देश्य नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, संतुलित और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाना आज की जरूरत है।



