
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: लालढांग की रवासन नदी में खनन का अजब खेल सामने आ रहा है। वन विकास निगम के तहत मजदूरों से खनन चुगान शुरू कराने के लिए जरूरी अनुमतियां अब तक नहीं मिली हैं, लेकिन नदी में पोकलेन मशीनों से जमकर खनन किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर ‘ऊपर के आदेश’ की चर्चा जोरों पर है। सवाल ये है कि मशीनों को चलाने की अनुमति किसने दी और नियमों की निगरानी करने वाले विभाग इस पूरे मामले में क्या भूमिका निभा रहे हैं
न्याय पंचायत लालढांग की रवासन नदी में हर साल वन विकास निगम के चुगान और रिवर ट्रेनिंग एवं समतलीकरण के पट्टे संचालित होते हैं। इस वर्ष वन विकास निगम के चुगान को वन स्वीकृति, पर्यावरणीय अनुमति और राष्ट्रीय हरित अधिकरण से संबंधित आवश्यक मंजूरियों का इंतजार बताया जा रहा है। दूसरी ओर, नदी में मशीनों से सामग्री निकाले जाने की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। लगातार खनन से नदी का तल गहरा होने के बीच समतलीकरण की अनुमति किस सर्वे के आधार पर दी गई, यह भी जांच का विषय है।
दो पट्टे, चार पोकलेन; नियमों की निगरानी कौन कर रहा है..?
जिला प्रशासन के नियमानुसार एक पट्टे पर एक पोकलेन मशीन से सामग्री उठाने का प्रावधान बताया गया है। इसके बावजूद दो पट्टों पर चार मशीनों के संचालन के आरोप हैं। जिला खान अधिकारी अमित गौरव ने भी एक पट्टे पर एक मशीन के नियम की पुष्टि की है। ऐसे में सवाल है कि यदि नियम स्पष्ट हैं तो मौके पर मशीनों की संख्या और संचालन की जांच कर नियमों का पालन क्यों नहीं सुनिश्चित किया जा रहा है?
बिना रवन्ने और ओवरलोडिंग के आरोप, कार्रवाई का इंतजार….
रवासन नदी से बिना रवन्ने वाहनों के संचालन और ओवरलोड सामग्री लेकर हरिद्वार-नजीबाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के गुजरने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इनकी पुष्टि के लिए खनन और परिवहन विभाग की जांच जरूरी है। पूर्व में मशीनों से खनन का विरोध करने वाले स्थानीय लोगों की इस बार चुप्पी भी चर्चा का विषय है। अब प्रशासन को मौके का निरीक्षण कर अनुमतियों, मशीनों की संख्या और खनन की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सवाल यह भी है कि यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?



