“जगजीतपुर के कब्रिस्तान पर कब्जे की कोशिश का आरोप, गरमाया मामला..
बहुजन क्रांति मोर्चा ने डॉ. एसके मिश्रा पर लगाया गंभीर आरोप, डीजीपी से कार्रवाई और पुलिस सुरक्षा की मांग..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; जगजीतपुर क्षेत्र स्थित एक कब्रिस्तान को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। बहुजन क्रांति मोर्चा उत्तराखंड ने अस्पताल संचालक डॉ. एसके मिश्रा पर कथित तौर पर दर्जनों हथियारबंद लोगों के सहयोग से कब्रिस्तान में मलबा डलवाकर जबरन कब्जा करने का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया है। संगठन की ओर से इस संबंध में पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजकर तत्काल कानूनी कार्रवाई और मौके पर पुलिस बल तैनात करने की मांग की गई है।
संगठन के प्रदेश संयोजक भंवर सिंह की ओर से भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि 11-12 सितंबर की रात सोशल मीडिया के माध्यम से बहुजन क्रांति मोर्चा के कार्यकर्ताओं को जगजीतपुर स्थित कब्रिस्तान में कथित तौर पर कब्जे के प्रयास की सूचना मिली। आरोप है कि कुछ हथियारबंद लोगों की मौजूदगी में डंपर से मलबा डालकर कब्रिस्तान की भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी।
शिकायत के मुताबिक, सूचना मिलने के बाद स्थानीय दलित-मुस्लिम लोगों ने मौके पर पहुंचकर कथित कब्जे के प्रयास को रोकने की कोशिश की और पुलिस को मामले की सूचना दी। संगठन ने आरोप लगाया कि इससे पहले 6 सितंबर को भी कब्रिस्तान में जेसीबी से कब्रों को कथित रूप से खुर्द-बुर्द कराया जा रहा था, जिसके बाद जेसीबी को पुलिस के हवाले किया गया था।
बहुजन क्रांति मोर्चा ने शिकायत में कहा है कि कब्रिस्तान की भूमि को लेकर लगातार हो रही गतिविधियों से क्षेत्र में तनाव और आक्रोश की स्थिति पैदा हो रही है। संगठन ने पुलिस-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कब्रिस्तान हरिद्वार-लक्सर मुख्य मार्ग के समीप स्थित है, लिहाजा किसी भी विवाद की स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। संगठन ने मौके पर पर्याप्त पुलिस व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठाई है।
बहुजन क्रांति मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि कथित कब्जे के प्रयास और शांति भंग करने के मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं की गई और मौके पर सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो संगठन और उसके विभिन्न आफसूट संगठनों के कार्यकर्ता कब्रिस्तान के पास धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। शिकायत की प्रतिलिपि उत्तराखंड शासन के प्रमुख सचिव को भी भेजी गई है।



