“भेल के अंदर कॉपर चोरी का खेल बेनकाब, सीआईएसएफ और पुलिस की मौजूदगी में भेलकर्मियों ने साथी को छुड़ाया..
सीआईएसएफ ने रानीपुर कोतवाली में दर्ज कराया मुकदमा, भेलकर्मी को भगाने वाले यूनियन नेता भी नामजद, मदद पर उठे सवाल..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: भेल जैसे संवेदनशील औद्योगिक प्रतिष्ठान के भीतर कॉपर चोरी का खेल सामने आया है। 660 मेगावाट जनरेटर की कॉपर बार के टुकड़े गायब होने की जांच में सीआईएसएफ ने एक स्थायी और एक संविदा कर्मचारी को संदिग्ध परिस्थितियों में पकड़ा। स्थायी कर्मचारी के पास से चोरी में इस्तेमाल होने वाले कटिंग उपकरण बरामद होने का दावा किया गया।
लेकिन कार्रवाई यहीं नहीं रुकी—पुलिस और सीआईएसएफ की मौजूदगी में ही कुछ भेलकर्मियों और यूनियन पदाधिकारियों पर पकड़े गए साथी को छुड़ाने का आरोप लगा है। मामले में सीआईएसएफ ने रानीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है, जिसमें चोरी के आरोपितों के साथ ही साथी को छुड़ाने वालों को भी नामजद किया गया है।
जनरेटर की कॉपर बार के टुकड़े गायब होने से शुरू हुई जांच……
पुलिस के मुताबिक, 29 अगस्त को भेल प्रबंधन ने 660 मेगावाट जनरेटर की कॉपर बार के कुछ टुकड़े गायब होने की जानकारी सीआईएसएफ को दी थी। मामला भेल परिसर के भीतर का होने के कारण सीआईएसएफ के खुफिया विभाग ने घटनास्थल के आसपास निगरानी शुरू कर दी। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी।
रात में दो संदिग्ध कर्मचारियों को रोककर पूछताछ….
देर रात सीआईएसएफ के उपनिरीक्षक सचिन कुमार ने पंप हाउस के रास्ते ब्लॉक की ओर जाते दो संदिग्धों को रोक लिया। पूछताछ में एक ने अपना नाम रेजिन चौहान बताते हुए खुद को भेल का स्थायी कर्मचारी बताया, जबकि दूसरा संविदा कर्मचारी था। पूछताछ के दौरान संविदा कर्मचारी प्लांट के भीतर भाग गया।
सीआईएसएफ ने रेजिन चौहान को रोककर उसके पास मौजूद प्लास्टिक बैग की तलाशी ली। बैग से ग्राइंडर, कटिंग उपकरण, बोरा और कटिंग ब्लेड मिलने का दावा किया गया। आरोप है कि आईकार्ड लिए जाने के दौरान रेजिन ने भी भागने की कोशिश की, लेकिन सीआईएसएफ ने उसे पकड़ लिया।
पुलिस पहुंची तो आरोपित को छुड़ाने का आरोप….
इसके बाद सीआईएसएफ ने रानीपुर कोतवाली पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम जब संदिग्ध कर्मचारी को थाने ले जाने के लिए पहुंची तो वहां कुछ भेलकर्मियों और यूनियन पदाधिकारियों ने विरोध शुरू कर दिया। सीआईएसएफ की तहरीर में आरोप लगाया गया है कि अश्वनी चौहान, अमरीश कुमार, आशुतोष कुमार, अरविंद कुमार, मुकुल राज, मुकेश कुमार गुप्ता और अवधेश कुमार समेत अन्य यूनियन पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने सरकारी कार्रवाई में बाधा डाली।
यूनियन नेताओं की भूमिका पर भी सवाल….
सीआईएसएफ का आरोप है कि विरोध के दौरान संदिग्ध कर्मचारी को वहां से छुड़ा लिया गया। पुलिस और सीआईएसएफ की मौजूदगी में आरोपित कर्मचारी को भगाए जाने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि कर्मचारी पर चोरी का संदेह था और उसके पास कटिंग उपकरण बरामद हुए थे तो उसे पुलिस के हवाले किए जाने के बजाय उसे छुड़ाने के लिए विरोध क्यों किया गया।
हालांकि, नामजद कर्मचारियों और यूनियन पदाधिकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष सामने नहीं आया है। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपित कर्मचारी को छुड़ाने में किसकी क्या भूमिका रही और कॉपर चोरी की घटना में कितने लोग शामिल थे।
चोरी के साथ आरोपित को छुड़ाने की भी होगी जांच….
रानीपुर कोतवाली प्रभारी मनोहर सिंह भंडारी ने बताया कि सीआईएसएफ की तहरीर के आधार पर आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी।



