उत्तराखंड

“पुलिस मुख्यालय के तबादला आदेशों की जिलों में उड़ रही धज्जियां, डीजीपी ने दिखाई सख्ती, 87 स्थगन आदेश रद्द..

बार-बार निर्देशों के बावजूद स्थानांतरित कर्मियों को रिलीव नहीं कर रहे जिलों के अधिकारी, 128 कार्मिकों को तत्काल कार्यमुक्त करने के आदेश

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पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून: उत्तराखंड पुलिस में तबादला आदेशों के पालन को लेकर पुलिस मुख्यालय और जिलों के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है। मुख्यालय द्वारा बार-बार निर्देश जारी किए जाने के बावजूद वर्ष 2024 और उससे पहले स्थानांतरित किए गए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को अब तक कार्यमुक्त नहीं किया गया। मामले की समीक्षा में गंभीर स्थिति सामने आने पर पुलिस महानिदेशक को सख्त रुख अपनाना पड़ा।पुलिस मुख्यालय की समीक्षा में पाया गया कि वर्ष 2024 और उससे पहले स्थानांतरित किए गए कुल 128 कार्मिक विभिन्न कारणों से अब तक अपने नए तैनाती स्थलों पर नहीं पहुंच सके हैं। इनमें 87 कार्मिक ऐसे हैं जिनके स्थानांतरण आदेश परिक्षेत्रीय कार्यालयों के स्तर पर स्थगित कर दिए गए थे, जबकि इन स्थगन आदेशों को पुलिस मुख्यालय की कोई स्वीकृति प्राप्त नहीं थी। इसके अलावा 21 कार्मिक अटैचमेंट पर कार्यरत होने के कारण अब तक मूल जनपद वापस नहीं भेजे गए, जबकि करीब 20 अन्य कार्मिकों को संबंधित जिलों द्वारा बिना किसी स्पष्ट कारण और सक्षम आदेश के कार्यमुक्त नहीं किया गया। स्थिति को स्थानांतरण नीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर मानते हुए पुलिस मुख्यालय ने सभी 87 स्थगन आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। साथ ही संबंधित जिलों और इकाइयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी लंबित मामलों में तत्काल कार्यवाही करते हुए कार्मिकों को उनके स्थानांतरित जनपदों के लिए कार्यमुक्त किया जाए।मुख्यालय के आदेश से यह भी साफ हो गया है कि कई जिलों में तबादला आदेशों को महीनों तक दबाकर रखा गया और बार-बार निर्देश मिलने के बावजूद उनका पालन नहीं किया गया। पुलिस मुख्यालय ने 21 मई और 27 मई को भी सभी संबंधित कार्मिकों को 28 मई तक कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी बड़ी संख्या में कार्मिक पुराने जनपदों में ही बने रहे। पुलिस महकमे में अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर मुख्यालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद तबादलों को लागू करने में इतनी देरी क्यों की गई। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या कुछ कार्मिकों को जानबूझकर जिलों में रोके रखा गया या फिर मुख्यालय के आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया गया।पुलिस महानिरीक्षक कार्मिक सुनील कुमारी मीणा की ओर से जारी आदेश में सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों, एसटीएफ, सीआईडी और अभिसूचना इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि वर्ष 2024 और उससे पूर्व के सभी लंबित स्थानांतरण आदेशों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कार्मिकों को कार्यमुक्त कर एलपीसी जारी करने और उसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजने के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यालय की इस सख्ती को जिलों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि अब तबादला आदेशों की अनदेखी और मनमानी को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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