“23 साल पुराने चोरी के मुकदमे में बड़ा फैसला, अधिवक्ता रीमा शाहिम की दमदार पैरवी से आरोपी बाइज्जत बरी..
द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सुनाया फैसला, बचाव पक्ष की दलीलों को माना मजबूत..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: करीब 23 साल पुराने चोरी के एक मामले में हरिद्वार की अदालत से बड़ा फैसला सामने आया है। द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार यादव की अदालत ने अभियुक्त आजाद अहमद खाँ को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त करार दिया है। लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे में अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से विद्वान अधिवक्ता रीमा शाहिम ने प्रभावी पैरवी करते हुए पुलिस जांच की कई खामियों को अदालत के समक्ष उजागर किया। उन्होंने दलील दी कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्य कमजोर, विरोधाभासी और पर्याप्त नहीं हैं। बचाव पक्ष की ओर से रखे गए तथ्यों और कानूनी तर्कों को गंभीरता से सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त करने का आदेश पारित किया।
बताया जा रहा है कि यह मामला वर्ष 2003 के आसपास दर्ज किया गया था, जिसकी सुनवाई लंबे समय से न्यायालय में चल रही थी। करीब दो दशक से अधिक समय तक चले इस मुकदमे का अंत आखिरकार आरोपी के पक्ष में हुआ। अदालत के फैसले के बाद आरोपी पक्ष और परिजनों ने राहत की सांस ली।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला इस बात का उदाहरण है कि न्यायालय केवल मजबूत और ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही किसी को दोषी मानता है। वहीं अधिवक्ता रीमा शाहिम की पैरवी की भी अधिवक्ता समुदाय और आम लोगों के बीच चर्चा हो रही है।



